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कश्मीर के सीमावर्ती गांवों में होम स्टे से बढ़ रहा पर्यटन

श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में बॉर्डर से सटे जिन गांवों में कभी गोलीबारी की आवाज गूंजा करती थी और लोग उन स्थानों पर जाने में डरते थे, अब वहां पर्यटक पहुंच रहे हैं. कई गांवों में स्थानीय लोगों ने घरों को पर्यटकों के लिए होम स्टे में बदल दिया है. जम्मू कश्मीर के बॉर्डर से लगे गांवों में होम स्टे के लिए करीब दस हजार कमरे उपलब्ध हैं.

जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता कहते हैं कि बॉर्डर पर्यटन को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों में खासा उत्साह है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीमावर्ती गांवों में होम स्टे योजना के तहत करीब एक हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इसके तहत दस हजार कमरे उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर्यटन से स्थानीय लोगों की जिंदगी में बदलाव आया है. वहीं, इससे पर्यटकों को भी नया अनुभव मिला है.

बॉर्डर पर्यटन को बढ़ावा जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर बॉर्डर पर्यटन बढ़ावा देने के लिए स्थानीय लोगों ने अपने घरों को होम स्टे में बदल दिया है. यहां पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं के साथ घर का खाना मिलता है. पर्यटक इन गांवों से सीमा को देखकर काफी रोमांचित होते हैं. पर्यटन विभाग भी स्थानीय लोगों की बॉर्डर पर्यटन को बढ़ावा देने में उनकी मदद कर रहा है.

सैलानियों के लिए खोली कई घाटियां

जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने कहा कि केरन, तंगधार, माछिल सेक्टर और बंगस घाटी को भी सैलानियों के लिए खोल दिया गया है. पर्यटन विभाग भी इन क्षेत्रों को अपनी पर्यटन स्थल की सूची में शामिल कर रहा है. ताकि, इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जा सके. बॉर्डर पर्यटन में सेना की भूमिका भी अहम है. जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सीमावर्ती गांव में होम स्टे शुरू करने वाले स्थानीय लोगों की सेना पूरी मदद कर रही है.

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