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टॉय ट्रेन रूट से देखिए शिमला की असली खूबसूरती

घूमने के लिहाज से गर्मी के कुछ खास ठिकानों की बात हो, तो शिमला उस लिस्ट में जरूर शामिल होता है. लेकिन अगर आपको शिमला की असली ख़ूबसूरती देखनी हो, तो टॉय ट्रेन रूट से सफर पर निकलिए. वैसे भी कालका-शिमला रेल से सफर करना कई लोगों का सपना होता है, इसलिए मैंने भी तय किया कि इस बार टॉय ट्रेन से ही यात्रा की जाएगी. सच कहिए तो कालका शिमला टॉय ट्रेन से यात्रा करना एक अद्भुत अनुभव रहा मेरे लिए.

आपको बता दें कि यह एक नैरो गेज रेलवे ट्रेन है, जो कालका से शिमला और शिमला से कालका तक भी चलती है. यह एक तरह की लग्जरी ट्रेन है, जो प्रकृति के ख़ूबसूरत नजारों को दिखाने के साथ-साथ बीते युग के रोमांस, रोमांच और पुरानी यादों को तरोताजा करती है. यह रूट कुल 96 किलोमीटर का है, जिसको पूरा करने में 5-6 घंटे का समय लगता है. यह ट्रेन अपने 96 किलोमीटर के सफर के दौरान कई ऐसी सुरंगों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरती है, जिसे देखकर किसी की भी सांसें थम जाएं और इसी रोमांच को पाने के लिए पर्यटक यहां आते हैं. आपको बता दें 1903 में अंग्रेजों द्वारा उनकी ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला तक पहुंचने के लिए यह रूट बनाया गया था, जो आपको समुद्रतल से 2,276 मीटर ऊपर खड़ी पटरियों पर ले जाता है. इसीलिए इसके महत्व को देखते हुए 2008 में यूनेस्को ने इसे अपनी विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है.

टॉय ट्रेन सफर की खासियत

यह रूट और ट्रेन अद्भुत इंजीनियरिंग का एक नायाब नमूना है, जो हिमालय की ख़ूबसूरती को खुद में समेटती हुई चलते हैं. यहां के मनमोहक दृश्य देखने के बाद कोई भी पर्यटक इसके आकर्षण को नहीं भुला पाता है. इस लाइन पर कुल 20 स्टेशन हैं और 103 सुरंगें, जिससे होकर ट्रेन गुजरती है. साथ ही साथ इसमें 912 वक्र और 969 पुल बने हुए हैं, जो किसी को भी रोमांचित कर सकते हैं. इन लाइन पर आने वाली सबसे लंबी सुरंग का नाम बरोग है, जिसकी लंबाई लगभग एक किलोमीटर के आसपास है. हालांकि अब इस रूट पर कई धीमी और तेज गति की भी ट्रेनें चलने लगी हैं, लेकिन अगर इनमें चुनाव करना हो, तो शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस, रेल मोटर कार और विस्टाडोम से यात्रा करना ज्यादा मजेदार रहेगा. यदि किसी को जल्दी यात्रा करनी है, तो रेल मोटर कार सबसे तेज गति से चलती है. जिससे महज चार घंटे में शिमला पहुंचा जा सकता है. रही बात यात्रा के साथ खानपान की, तो बेहतर होगा कि आप अपना खाना पैक करके ही ले जाएं. कुछ स्टेशन ऐसे हैं, जहां पर शायद आपको खाने-पीने की मनपसंद चीजें न मिलें.

प्रकृति का अद्भुत सम्मोहन

इस यात्रा के दौरान सबसे खास बात रास्ते में आने वाले प्राकृतिक नजारे हैं. पूरा रूट ही हरे-भरे पेड़ पौधों से भरा हुआ है, जो देखने में काफी रोमांचक लगता है. बीच-बीच में आने वाले स्टेशन किसी ऐसी जगह की याद दिलाते हैं, जिसे देखकर हम सालों पहले भूल गए हों. कालका से चलने के तकरीबन एक घंटे के बाद ट्रेन सबसे पहले बरोग स्टेशन पर रुकती है. दस मिनट के इस ठहराव के दौरान मन आसपास के नजारों में ऐसे खो जाता है कि समय का पता ही नहीं चलता. पूरे रास्ते में ट्रेन की रफ्तार इतनी धीमी होती है कि कभी भी नीचे उतर कर चढ़ा जा सकता है.

अगर शॉपिंग के शौकीन हैं तो…

शॉपिंग के शौकीन लोग अपनी पसंदीदा जगह पर कुछ न कुछ नया तलाशते ही रहते हैं. अगर आप उन्हीं में से एक हैं, तो शिमला के मशहूर लक्कड़ बाजार जाना मत भूलिएगा. सड़क के दोनों ओर लगने वाली यहां की दुकानों में लकड़ी की खूबसूरत कलाकृतियां पर्यटकों को खास लुभाती हैं. आप यहां से स्मृति चिन्ह के अलावा लकड़ी के बर्तन और तरह-तरह के गिफ्ट आइटम खरीद सकते हैं. वैसे यह बाजार अपने कुल्लू शॉल और सूखे मेवों के लिए भी खास लोकप्रिय है, जिसकी खरीदारी आप कर सकते हैं.

कैंपिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग, स्कीइंग या सूरज की हल्की किरणों का आनंद लेते हुए मेडिटेशन, हिमाचल प्रदेश के शिमला में सभी के लिए कुछ-न-कुछ है. लेकिन इन सबसे अलग टॉय ट्रेन रूट से शिमला की प्राकृतिक सुंदरता को निहारने का अलग ही रोमांच है. अपना अनुभव बता रहे हैं संजय शेफर्ड

कैसे और कब जाएं

टॉय ट्रेन से सफर के लिए जून सही समय है. कालका के लिए चंडीगढ़ और दिल्ली से कुछ सीधी ट्रेनें भी हैं. कालका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंच कर भी आप आगे का सफर टैक्सी से कर सकते हैं.

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