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खराब हवा में सांस ले रही भारत की 99 आबादी विश्व बैंक

साफ हवा, भूमि और महासागर मानव स्वास्थ्य और पोषण के लिए महत्वपूर्ण हैं. लेकिन दुनियाभर की 94 फीसदी आबादी साफ हवा में सांस नहीं ले पा रही है, क्योंकि हवा में पीएम 2.5 का स्तर काफी ज्यादा है. भारत की बात करें तो यहां 99 फीसदी आबादी खराब हवा में सांस ले रही है.

यह खुलासा विश्व बैंक की नई रिपोर्ट से हुआ है. रिपोर्ट के लिए किए गए अध्ययन के आंकड़े चौंकानेवाले हैं. अध्ययन के अनुसार दुनियाभर में 7.3 अरब लोग वायु प्रदूषण के खराब स्तर का सामना कर रहे हैं.

मौतों के लिए जीवाश्म ईंधनों पर छूट जिम्मेदार

विश्व बैंक के अनुसार दुनियाभर में वायु प्रदूषण तथा मौतों के लिए जीवाश्म ईंधन सब्सिडी (छूट) जिम्मेदार है. उदाहरण के लिए कृषि सब्सिडी के कारण हर साल 2.2 मिलियन हेक्टेयर जंगल का नुकसान होता है. यह वैश्विक वनों की कटाई के 14 प्रतिशत के बराबर है. सब्सिडी जूनोटिक और वेक्टर जनित बीमारियों, विशेष रूप से मलेरिया के प्रसार में भी शामिल हैं.

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में खराब हवा में रहनेवाले 36 फीसदी लोग भारत और चीन में रहते हैं. भारत में 1.36 अरब लोग (जनसंख्या का 99 प्रतिशत) असुरक्षित पीएम 2.5 कंसंट्रेशन के संपर्क में हैं, जिनमें से 1.33 अरब (96 प्रतिशत) खतरनाक स्तर का सामना कर रहे हैं. चीन में, 1.41 अरब लोग वायु प्रदूषण के प्रभाव में हैं जिनमें 53 खतरनाक स्तरों का सामना कर रहे हैं.

हर साल 70 लाख लोग अकाल मौत मर रहे

विश्व बैंक की नई रिपोर्ट डिटॉक्स डेवलपमेंट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर 5 में से 1 मौत के लिए खराब वायु गुणवत्ता जिम्मेदार है. जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से होनेवाले वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अत्यधिक गरीबी में रहने वाले 71.6 करोड़ लोग सीधे असुरक्षित पीएम 2.5 सांद्रता के संपर्क में हैं . वायु प्रदूषण सिर्फ पीएम 2.5 तक सीमित नहीं है; इसमें ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड सहित प्रदूषकों का एक जहरीला मिश्रण होता है.

दुनिया की 94 फीसदी आबादी असुरक्षित पीएम 2.5 कंसंट्रेशन के संपर्क में, 7.3 अरब लोग दुनियाभर में वायु प्रदूषण की चपेट में, 2.8 अरब खतरनाक स्थिति में.

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