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ग्लेशियरों की सेहत पर रहेगी 74 अत्याधुनिक मौसम केंद्रों की नजर

देहरादून. उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की सेहत पर नजर रखने के लिए 74 अत्याधुनिक मौसम केंद्र बनाए जा रहे हैं. ये हिमखंडों में आ रहे परिवर्तन और संभावित आपदाओं पर नजर रखेंगे. चंड़ीगढ़ स्थित रक्षा भू-संपदा विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) हिमालयी मौसम के अध्ययन के लिए ये केंद्र स्थापित कर रहा है.

इसलिए लिया निर्णय हालिया कुछ वर्षों में तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियरों के पिघलने और अपना स्थान छोड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं. पिछले साल सितंबर-अक्तूबर के दौरान केदारनाथ मंदिर के पीछे हिमस्खलन हुए थे. उस वक्त भी डीजीआरई ने ही इसकी जांच की थी. इसी के बाद प्रतिष्ठा ने राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए यह निर्णय लिया था.

इसलिए महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन को मजबूती मिलने के साथ ही सामरिक लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा. उत्तर भारत की प्रमुख नदियां गंगा और यमुना भी ग्लेशियर से ही निकलती हैं. ऐसे में उद्गम स्थल पर इन नदियों की निगरानी में भी यह स्टेशन अहम साबित होंगे. डीजीआरई यहां लगातार अध्ययन करेगा और राज्य सरकार के साथ भी अपना डाटा साझा करेगा. राज्य सरकार इसके लिए अनुमति दे चुकी है.

बचाव की रणनीति पहले बना सकेंगे

मौसम के बदलाव का भी डाटा जुटाया जाएगा. जिससे तापमान में बदलाव का सही आकलन हो सकेगा. ग्लेशियर के प्रभावित होने को लेकर डाटा आने के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा सकेगी. इससे ग्लेशियरों से होने वाली आपदाओं से बचाव हो सकेगा.

चमोली में ज्यादा हिमखंड

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की संख्या 9500 से अधिक है. उत्तराखंड के चमोली जिले में सबसे अधिक 310 हैं.

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