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आयुर्वेदिक तरीकों से पेट को रखें ठंडा

गर्मियों में आइसक्रीम व फ्रिज में रखी दूसरी कई चीजों को खाना अच्छा लगता है. पर, ये सभी चीजें तासीर में ठंडी नहीं होतीं. खासकर, जिन्हें पित्त से जुड़ी समस्या है, उनमें कुछ चीजों का सेवन इस मौसम में पेट की गर्मी, एसिडिटी, त्वचा का फटना व चिड़चिड़ापन बढ़ा देता है. पोषण और वेलनेस एक्सपर्ट करिश्मा शाह के अनुसार, ‘संपूर्ण तंदुरूस्ती के लिए आंत को ठंडा रखना जरूरी है. खासकर, प्राकृतिक चीजों पर ध्यान रखें. कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जो शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित बनाए रखते हुए पाचन को बढ़ावा देती हैं.’

एलोवेरा जूस पाचन तंत्र को ठंडा रखता है. आंतों की गर्मी व पेट में जलन में राहत मिलती है. साथ ही इसका जूस शरीर को देर तक हाइड्रेट रखता है.

इलायची के बीज सीने में जलन व मिचली के लक्षणों को कम करते हैं. पानी में इलायची के बीजों को उबालकर पीना भी शरीर को ठंडक देता है. सांस तरोताजा रहती है. साथ ही शरीर से अशुद्ध तत्वों को बाहर निकालने में मदद मिलती है.

धनिया के बीज और पत्ते अपने ठंडे गुणों के लिए जाने जाते हैं. धनिये के पत्तों या बीजों की हर्बल चाय बनाकर पिएं. धनिये का पानी पाचन क्रिया को सक्रिय रखता है. रोज सुबह खाली पेट पिएं.

पुदीने की पत्तियां ठंडक और ताजगी से भरपूर होती हैं. पुदीने की चाय या इंफ्यूज्ड पानी आंत को ठंडा करने, सूजन कम करने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

सौंफ पाचन तंत्र की गर्मी कम करती है. खाने के बाद नियमित सेवन जलन व एसिडिटी को कम करता है. सौंफ का पाउडर, चाय या शर्बत किसी भी रूप में ले सकते हैं.

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