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नया बैंक लॉकर एग्रीमेंट मुसीबत का सबब बना

बैंक कीमती वस्तुओं को लॉकर में सुरक्षित रखने की सुविधा ग्राहकों को प्रदान करते हैं, लेकिन आरबीआई का नया लॉकर एग्रीमेंट (करार) उनके लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. बैंकों में करार प्रक्रिया में एकरूपता की कमी के कारण यह मुसीबत बन गई है. कुछ बैंक सिर्फ केवाईसी से जुड़े कागजात लेकर प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं तो कई स्टांप शुल्क वसूल रहे हैं. इसके अलावा फाइल चार्ज के नाम पर भी ग्राहकों की जेब ढीली की जा रही है.

बैंकों की मनमानी रोकने और ग्राहकों को नुकसान से बचाने के लिए नया एग्रीमेंट किया जा रहा है. वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरबीआई ने यह प्रक्रिया शुरू की थी. 30 जून तक सभी बैंकों को अपनी शाखाओं में लॉकर रखने वाले 50 फीसदी ग्राहकों के साथ यह करार करना था, लेकिन बैंकों के अलग-अलग नियम होने की वजह से ऐसा नहीं हो पाया.

केवाईसी से जुड़े कागजात ले रहे राजधानी में पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक समेत अन्य सरकारी बैंक सिर्फ केवाईसी से जुड़े कागजात ले रहे हैं, जिसमें पैन कार्ड, आधार कार्ड, दो पासपोर्ट साइज फोटो और एग्रीमेंट के प्रारूप पर हस्ताक्षर शामिल है. वे इसके बदले किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूल रहे. वहीं, निजी क्षेत्रों के बैंकों में व्यवस्था अलग-अलग है. ये स्टांप शुल्क के नाम पर पांच सौ रुपये शुल्क ले रहे हैं. 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बैंक लॉकर को लेकर ग्राहकों को गारंटी मिलनी चाहिए, क्योंकि लोग अपने जीवन की जमापूंजी बैंकों में रखते हैं. इसके बाद आरबीआई ने लॉकर को लेकर मसौदा तैयार किया, जिस पर बैंकों को ग्राहकों के साथ नया करार करने को कहा गया.

ग्राहक परेशान हैं, क्योंकि नए लॉकर एग्रीमेंट को लेकर बैंकों के अलग-अलग नियम हैं. इसका कुछ बैंक लाभ उठा रहे हैं. निजी बैंकों में ज्यादा दिक्कतें है. ऐसे में आरबीआई को एक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चाहिए. – अश्वनी राणा, पूर्व बैंक अधिकारी

सौ गुना भरपाई की गारंटी देता है बैंक

समझौते के तहत अगर आग, चोरी या बैंक की इमारत गिरने पर लॉकर में रखे सामान का नुकसान होता है तो बैंक को सालाना लॉकर शुल्क का 100 गुना ग्राहक को देना होगा. इसके साथ ही लॉकर को सुरक्षित बनाने के लिए बैंक को लॉकर रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे.

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