अन्य खबरट्रेंडिंगमनोरंजन

सकारात्मक माहौल में पढ़ाई से याद रहेगा पाठ

तकनीक की इस दुनिया में लोग धीरे-धीरे किताबों से दूर होते जा रहे हैं, जिसका दुष्प्रभाव भी स्वास्थ्य पर नजर आ रहा है. वहीं दूसरी ओर किताबों के करीब रहने वाले लोगों का मानसिक स्वास्थ्य हमेशा बेहतर बना रहता है. यह बात हाल ही में किए गए एक शोध में पता चली है. इसके अनुसार, बचपन में अनुकूल या सकारात्मक माहौल में पढ़ाई से किशोरों के मस्तिष्क की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है व लंबे समय तक उनका मस्तिष्क तरोताजा बना रहता है.

साइकोलॉजिकल मेडिसिन नाम के जर्नल में छपे इस अध्ययन में 10,243 किशोरों को शामिल किया गया और उन्हें एक सप्ताह में 12 घंटे तक पढ़ाई करने को कहा गया, ताकि उनके मस्तिष्क की संरचना के विकास के स्तर का पता चल सके. इसमें किशोरों की मौखिक शिक्षा, याददाश्त, बोलने की क्षमता और स्कूल में शैक्षणिक उपलब्धि आदि की जांच की गई. इसमें पता चला कि किशोरों की मानसिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव हुआ.

किशोरों का स्क्रीन टाइम भी कम हुआ अध्ययन में बताया गया कि जिन बच्चों ने मस्ती के लिए पढ़ना शुरू किया, उन्होंने स्क्रीन पर भी कम समय व्यतीत किया. यानी इन बच्चों ने टीवी, स्मार्ट फोन या टेबलेट से बचना ही सही समझा. पूरे सप्ताह के दौरान और सप्ताह के अंत में किशारों ने नींद भी पर्याप्त मात्रा में ली. जब किशोरों के मस्तिष्क की जांच की गई, तो पाया गया कि जिन बच्चों ने कम उम्र में पढ़ाई आरंभ कर दी थी, उनके कार्यों को करने की क्षमता पहले के मुकाबले बढ़ गई.

किशोरों में नियम तोड़ने जैसे व्यवहार में भी कमी आई

शोधकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन से इन बच्चों की मानसिक अवस्था भी बेहतर हुई. इसमें किशोरों के माता-पिता और शिक्षकों के द्वारा दिए गए अंकों एवं रिपोर्टों का भी उपयोग मूल्यांकन में किया गया. पढ़ाई करने वाले बच्चों में तनाव और अवसाद के लक्षण भी कम दिखाई दिए और उनकी एकाग्रता में बढ़ोतरी हुई. साथ ही साथ बच्चों में नियम तोड़ने या उसका उल्लंघन करने जैसे व्यवहार भी कम दिखाई दिए.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button