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दवा कंपनियों के लिए शेड्यूल एम जरूरी

नई दिल्ली . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की दवा कंपनियों के लिए शेड्यूल एम के प्रावधानों को लागू करना अनिवार्य कर दिया है.

छह महीने से लेकर एक साल के भीतर सभी 8500 दवा कंपनियों को इन प्रावधानों को लागू करना होगा. इसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित गुड मैन्युफैक्चरिग प्रैक्टिस (जीएमपी) को लागू किया जाना होता है. इसका मकसद दवा निर्माण की गुणवत्ता में सुधार करना है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस समय देश में 10500 दवा कंपनियां है जिनमें से 8500 एमएसएमई क्षेत्र की हैं. कुल कंपनियों में से 2000 के पास ही जीएमपी प्रमाणन है तथा वह शिड्यूल एम के तहत आती हैं. जबकि शेष दवा कंपनियों ने अभी तक इन प्रावधानों को लागू नहीं किया है.

मंत्रालय ने कहा कि अब नये आदेश में कहा गया है कि जिन दवा कंपनियों का सालाना र्टन ओवर 250 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें एक साल के भीतर शिड्यूल एम का क्रियान्वयन करना होगा. जिनका र्टन ओवर 250 करोड़ से ज्यादा है, उन्हें छह महीने के भीतर पूरा करना होगा.

मंत्रालय ने कहा कि छह महीने के बाद प्रगति की समीक्षा होगी और उसके बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

यह है शिड्यूल-एम ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 का शेड्यूल एम एक हिस्सा है. इसमें फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन के निर्माण कार्यों के लिए अनिवार्य शर्तें लागू की गई हैं. इसके तहत दवा की गुणवत्ता निर्माता की एकमात्र जिम्मेदारी है.

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