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बचत खाते पर कम ब्याज मिलने से एफडी में अधिक निवेश हुआ

बैंक ग्राहक तेजी से अपने कम ब्याज वाले बचत खाते से पैसा निकाल कर एफडी करवा रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस वक्त बचत खाते और सावधि जमा की ब्याज दरों का अंतर तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. इस कदम से बैंकों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है, क्योंकि उनकी जमा की लागत में लगातार इजाफा होता जा रहा है.

पिछले तीन साल से बचत खातों पर मिलने वाले ब्याज की दर में कोई बदलाव नहीं हुआ हैै. उदाहरण के लिए भारतीय स्टेट बैंक वर्ष 2020 से जहां बचत खाते पर 2.7 से तीन फीसदी ब्याज देता है, वहीं दो साल की एफडी पर 6.8 फीसदी ब्याज दे रहा है.

आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक संदीप बत्रा कहते हैं कि एफडी दरों का बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि पहले दोनों दरों में अंतर काफी कम था.

● दरें बढ़ते ही बचत-सावधि जमा में अंतर बढ़ जाता है

● 260 आधार अंक का अंतर तीन वर्ष के उच्च स्तर पर

● वित्त वर्ष 21 और 22 में क्रमश 220 और 230 आधार अंक था

चालू और बचत खाते के मुकाबले एफडी की दर में अंतर तेजी से बढ़ रहा है. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पास बचत और चालू खाते में पड़ी राशि पिछले साल के 50 के मुकाबले इस साल 46.5 रही जबकि एफडी जमा में वृद्धि दर बीते साल के 27 के मुकाबले 66 रही.

ऊंची ब्याज दर की चाहत

वैसे तो बचत खातों पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन बैंकों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एफडी पर ब्याज दरों में तेज वृद्धि की है

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