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5 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलैस इलाज योजना पर बड़ा कदम, 29 जुलाई को कर्मचारी संगठनों के साथ होगी अहम बैठक

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लगभग 5 लाख शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारजनों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर 29 जुलाई को मंत्रालय (महानदी भवन) में स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में कर्मचारी संगठनों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा कर कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे, जिसके बाद संशोधित मसौदा तैयार कर मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट में कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना के संचालन के लिए राज्य नोडल एजेंसी ने प्रारंभिक कार्ययोजना तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करा दी है। बैठक में इस कार्ययोजना के प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों के हितों के अनुरूप इसे अंतिम रूप दिया जा सके।

कर्मचारी संगठनों के सुझावों के बाद होगा अंतिम निर्णय

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि फेडरेशन ने 7 जुलाई को मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मांग की थी कि कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना लागू करने से पहले कर्मचारी संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए। उनका कहना था कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना को व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए संगठनों की राय लेना आवश्यक है।

फेडरेशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि बजट में घोषणा होने के कई माह बाद भी योजना से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। पात्रता, सूचीबद्ध अस्पतालों का पंजीयन, उपचार की प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रावधान स्पष्ट नहीं होने से कर्मचारियों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

मुख्य सचिव के निर्देश पर बुलाई गई बैठक

कर्मचारी संगठनों की मांग को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को इस विषय पर विस्तृत बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। इसी के तहत 29 जुलाई को स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर कार्ययोजना में आवश्यक संशोधन कर जल्द ही इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

योजना लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलैस उपचार की सुविधा मिल सकेगी, जिससे इलाज के लिए तत्काल आर्थिक व्यवस्था करने की परेशानी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

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