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पोस्टमार्टम नहीं होने के बावजूद सड़क हादसे में मौत मानी, कोर्ट ने मृतक की पत्नी को 9.01 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

रायपुर। नवम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, रायपुर ने सड़क दुर्घटना में घायल होकर बाद में दम तोड़ने वाले राधेश्याम वर्मा के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उनकी पत्नी और पुत्री को 9 लाख 1 हजार 800 रुपये का मुआवजा 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट कहा कि केवल पोस्टमार्टम नहीं होने से यह नहीं माना जा सकता कि मृत्यु सड़क दुर्घटना से नहीं हुई। उपलब्ध चिकित्सीय दस्तावेज, एफआईआर और अन्य साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि घायल की मौत दुर्घटना में आई गंभीर चोटों के कारण हुई।  अधिकरण की पीठासीन अधिकारी श्रीमती पल्लवी तिवारी ने 31 जुलाई को यह निर्णय सुनाया।

टाटीबंध चौक पर हुआ था हादसा

प्रकरण के अनुसार 6 अगस्त 2022 की शाम राधेश्याम वर्मा अपनी मोटरसाइकिल से जा रहे थे। टाटीबंध चौक के पास पीछे से आए ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें एम्स ले जाया गया, लेकिन बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण ओम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर होने पर दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। आठ दिन इलाज के बाद परिजन उन्हें घर ले आए और अगले दिन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।

बीमा कंपनी ने उठाए थे सवाल

बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना के सात दिन बाद हुई मौत का सड़क हादसे से संबंध साबित नहीं है, क्योंकि मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था। कंपनी ने यह भी कहा कि अस्पताल से छुट्टी मिलने से उनकी हालत में सुधार था और मौत सामान्य कारणों से हुई होगी।

कोर्ट ने खारिज की दलील

अधिकरण ने बीमा कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि मेडिकल लीगल रिपोर्ट, ओम अस्पताल के रिकॉर्ड, डॉक्टर की राय और मृत्यु प्रमाणपत्र से यह स्पष्ट है कि राधेश्याम वर्मा की हालत दुर्घटना के बाद लगातार गंभीर बनी रही और 14 अगस्त 2022 को उनकी मृत्यु उन्हीं चोटों के कारण हुई। इसलिए केवल पोस्टमार्टम नहीं होने के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

लापरवाही से ट्रक चलाने का आरोप साबित

अधिकरण ने एफआईआर, चार्जशीट, मेडिकल दस्तावेज और प्रत्यक्षदर्शी के बयान के आधार पर माना कि ट्रक चालक ने तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी। बीमा कंपनी यह भी साबित नहीं कर सकी कि वाहन बीमा शर्तों के उल्लंघन में चलाया जा रहा था।

18.90 लाख की जगह 9.01 लाख मुआवजा

याचिकाकर्ताओं ने 18.90 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। हालांकि अधिकरण ने मृतक की आय, उम्र और आश्रितों की संख्या का आकलन करते हुए उनकी मासिक आय 10 हजार रुपये मानी। विवाहित पुत्री को आर्थिक रूप से आश्रित नहीं माना गया, जबकि पत्नी को एकमात्र आश्रित माना गया। उपचार खर्च, आश्रितता की हानि, संपदा की हानि, अंत्येष्टि व्यय तथा कंसोर्टियम सहित कुल 9 लाख 1 हजार 800 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया।

7 प्रतिशत ब्याज भी मिलेगा

अधिकरण ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 30 दिनों के भीतर 9,01,800 रुपये की राशि दावा प्रस्तुत किए जाने की तारीख से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जमा करेगी। मुआवजे में से विवाहित पुत्री को 45 हजार रुपये दिए जाएंगे, जबकि शेष राशि मृतक की पत्नी को मिलेगी। इसमें से 1.50 लाख रुपये उनके खाते में स्थानांतरित किए जाएंगे और बाकी राशि पांच वर्ष के लिए सावधि जमा में रखी जाएगी।

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