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गलत ब्योरा देने से हर तीसरा पीएफ दावा रद्द

नई दिल्ली: ईपीएफओ से जुड़े सदस्यों को अपने पीएफ दावों को निपटाने में मुश्किलों का सामना कर पड़ा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में पीएफ दावों के करीब 13 फीसद मामले खारिज हुए थे, जो वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर लगभग 34 प्रतिशत हो गए है. यानि हर तीन ईपीएफ दावों में से एक दावा नामंजूर हो रहा है.

क्लेम मिलने में देरी होने और भारी संख्या में दावे खारिज करने की काफी शिकायतें सोशल मीडिया पर आ रही हैं. ईपीएफओ अधिकारियों का कहना है कि पीएफ दावे तेजी से अस्वीकार होने की बड़ी वजह ऑनलाइन प्रक्रिया है. ऑनलाइन आवेदन में कुछ गलतियां हो जाती हैं और क्लेम खारिज हो जाता है.

ये खामियां ठीक करें

1. केवाईसी अपडेट करें

2. आधार संख्या और यूएएन को लिंक करें

3. बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड को जांचें

4. ईपीएफओ के रिकॉर्ड में अपने गलत विवरण को ठीक कराएं

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