नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह नकली और अस्पतालों से कथित तौर पर चोरी की गई महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद-बिक्री में शामिल था। पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और हैदराबाद समेत कई शहरों में छापेमारी कर अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और ठिकानों से करीब नौ करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं बरामद की गई हैं। इनमें कैंसर के इंजेक्शनों की 588 भरी वायल, छह खाली वायल, सात खाली डिब्बे और अन्य दवाओं की 3,021 यूनिट शामिल हैं। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद, उपकरण, रजिस्टर और डायरियां भी बरामद हुई हैं।
क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर एचजीएस धालीवाल के मुताबिक, 22 जून को पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की अवैध खरीद और बड़े स्तर पर सप्लाई कर रहे हैं।एसीपी की निगरानी में सात टीमें गठित की गईं। पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में संदिग्ध ठिकानों की पहचान के बाद 11 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की।
जांच में सामने आया कि अनधिकृत स्रोतों से नकली दवाएं हासिल की जाती थीं। दूसरा, अस्पतालों में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए रखी दवाओं को कथित तौर पर चोरी कर बाहर निकाला जाता था। तीसरे तरीके में सरकारी संस्थानों की दवाओं को अवैध रूप से डायवर्ट किया जाता था। तीन तरीकों से जुटाते थे दवाएं
जांच में सामने आया कि गिरोह तीन प्रमुख तरीकों से एंटी-कैंसर दवाओं का इंतजाम करता था। पहला, अनधिकृत स्रोतों से नकली दवाएं हासिल की जाती थीं। दूसरा, अस्पतालों में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए रखी दवाओं को कथित तौर पर चोरी कर बाहर निकाला जाता था। तीसरे तरीके में सरकारी संस्थानों और गोदामों में भेजी गई दवाओं को कथित तौर पर अवैध रूप से डायवर्ट किया जाता था।
संभालकर रखते थे खाली डिब्बे
आरोपी पुरानी दवा की पैकिंग, कार्टन और खाली डिब्बे संभालकर रखते थे। जरूरत पड़ने पर इन्हीं का इस्तेमाल दोबारा पैकिंग के लिए किया जाता था। दवाओं की असली पहचान छिपाने के लिए बैच नंबर, एमआरपी और अन्य पहचान संबंधी जानकारी एसीटोन जैसे रसायन से मिटाई जाती थी। इसके बाद दवाओं को थर्माकोल बॉक्स, बबल रैप, टेप और पॉलीथिन में पैक कर बिचौलियों के माध्यम से अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था।
अलग-अलग लोगों को दी गई थी जिम्मेदारी
पुलिस के मुताबिक नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति की अलग भूमिका थी। कोई दवाओं का इंतजाम करता था, कोई उन्हें रिहायशी इलाकों में छिपाकर रखता था, जबकि कुछ आरोपी पैकिंग और सप्लाई का काम करते थे। लक्ष्मी नगर निवासी अभिषेक वैश्य 2022 से अवैध चैनल के जरिए एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद और सप्लाई में शामिल बताया गया है। उसके ठिकाने से दवाएं, पैकिंग सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रजिस्टर और चार लाख रुपये बरामद हुए।
जालसाजों ने बनाया पूरा नेटवर्क
शुभम कुमार चौधरी पर 2023 से बिना बिल और नगद लेन-देन के जरिए दवाओं की खरीद-बिक्री का आरोप है। उसके पास से दवाएं और 23 लाख रुपये बरामद हुए। उसका भाई सूरज चौधरी भी कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़ा था। गाजियाबाद के गगन पर दवाएं आगे पहुंचाने का आरोप है, जबकि सतीश कुमार को दवा सप्लाई में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाला बताया गया है। गुरुग्राम के मुकेश पर अस्पतालों से एंटी-कैंसर दवाएं हासिल कर फार्मासिस्ट और ब्रोकरों तक पहुंचाने का आरोप है। उसकी गाड़ी से 12 वायल, अन्य दवाएं, पैकिंग सामग्री और 16.50 लाख रुपये मिले। नोएडा के आनंद कुमार को सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण बिचौलिया बताया गया है। उसके ठिकाने से 337 एंटी-कैंसर वायल और अन्य दवाएं बरामद होने की बात पुलिस ने कही है।
अस्पतालों से भी जुड़ी मिली कड़ी
जांच में हैदराबाद, फरीदाबाद और राजस्थान के अस्पतालों से भी नेटवर्क के तार जुड़े मिले। हैदराबाद के श्रीनिवासुलु कलवा के पास से 23 संदिग्ध नकली एंटी-कैंसर दवाएं मिलीं। रामदास सतीश कुमार और मालुगारी श्रीनाथ रेड्डी पर अस्पतालों में मरीजों के लिए रखी दवाओं को कथित तौर पर बाहर निकालकर सप्लाई करने का आरोप है। फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि का संबंध एक नामी अस्पताल से बताया गया है। वह वहां ऑन्कोलॉजिस्ट के निजी सहायक के रूप में काम कर चुका था। पुलिस के मुताबिक, उसे नर्सिंग स्टाफ से एंटी-कैंसर वायल मिलती थीं। उसके घर से 108 वायल और 6.50 लाख रुपये बरामद हुए। फरीदाबाद के जसवंत शर्मा और राजस्थान के अलवर निवासी मनीष शर्मा पर भी अस्पतालों से दवाएं कथित तौर पर बाहर निकालने का आरोप है। क्राइम ब्रांच अब आरोपियों के वित्तीय लेन-देन, दवाओं के स्रोत और पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस को आने वाले दिनों में गिरोह से जुड़े कुछ और लोगों की गिरफ्तारी और अतिरिक्त बरामदगी की उम्मीद है।


















