रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र के ग्राम गोढ़ी में वर्ष 2023 में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में विशेष न्यायालय (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दो-दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने के प्रयास और एससी-एसटी एक्ट के तहत सभी आरोपों को सिद्ध माना।
विशेष न्यायाधीश श्रीमती शोभना कोष्ठा की अदालत ने 31 जुलाई 2026 को यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने हरिलाल उरांव, मुकेश पडिहारी, जितेंद्र पटनायक उर्फ जीतू और गणेश पडिहारी को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) (प्रकरण में लागू प्रावधान) के तहत दोहरे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
पुरानी रंजिश में हुई थी दो लोगों की हत्या
अभियोजन के अनुसार, 19 जुलाई 2023 की रात करीब 10:30 बजे ग्राम गोढ़ी में पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडे और अन्य घातक हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी थी।
वारदात के बाद आरोपियों ने अपराध को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। इसके लिए एक मृतक के शव को मुख्य सड़क तक घसीटकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया।
वैज्ञानिक जांच बनी दोषसिद्धि का आधार
घटना की सूचना मिलते ही तमनार थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। तत्कालीन थाना प्रभारी आशीर्वाद रहटगांवकर ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कराया, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद किए।
इसके बाद एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत मामले की आगे की जांच तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा ने की। उनके निर्देशन में महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए, जाति संबंधी साक्ष्य एकत्र किए गए और सभी साक्ष्यों के आधार पर मजबूत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
प्रभावी पैरवी से मिला फैसला
राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने मामले में प्रभावी पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों को न्यायालय ने विश्वसनीय मानते हुए चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने अपने फैसले में माना कि यह हत्या पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत की गई थी और आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने का भी प्रयास किया था। इसी आधार पर उन्हें दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने वाला माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वैज्ञानिक विवेचना, मजबूत अनुसंधान और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से गंभीर अपराधों में दोषियों को कठोर सजा दिलाई जा सकती है।


















