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आयुष्मान अस्पतालों के लिए एबीडीएम सॉफ्टवेयर अनिवार्य: 30 अगस्त तक लागू नहीं किया तो अटक सकता है भुगतान, मान्यता पर भी संकट

रायपुर। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत मरीजों का उपचार करने वाले शासकीय और निजी अस्पतालों के लिए अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) सॉफ्टवेयर का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के निर्देशों के अनुसार सभी पंजीकृत अस्पतालों को 30 अगस्त तक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ना होगा। निर्धारित समयसीमा तक सॉफ्टवेयर लागू नहीं करने वाले अस्पतालों का प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भुगतान रुक सकता है और आयुष्मान योजना के तहत उनकी मान्यता भी प्रभावित होने की आशंका है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एबीडीएम के माध्यम से आयुष्मान योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है, जिससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और उपचार संबंधी सभी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।

मरीजों का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित

वर्तमान में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पताल अलग-अलग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं। अब सभी अस्पतालों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के डिजिटल मानकों के अनुरूप एबीडीएम प्लेटफॉर्म अपनाना होगा।

इस व्यवस्था के तहत मरीज की आभा (एबीएचए) आईडी के माध्यम से उसका डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड देश में कहीं भी देखा जा सकेगा। इससे मरीज को बार-बार पुराने दस्तावेज या जांच रिपोर्ट साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत चिकित्सक एक क्लिक में मरीज का उपचार इतिहास देख सकेंगे।

अस्पतालों को भी होगा फायदा

नई डिजिटल व्यवस्था से अस्पतालों को भी राहत मिलेगी। कागजी रजिस्टरों और रिकॉर्ड के रखरखाव की आवश्यकता कम होगी। मरीजों का डेटा सुरक्षित तरीके से संग्रहीत रहेगा और आयुष्मान योजना के तहत क्लेम प्रस्तुत करने एवं उसके निपटान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और डिजिटल रिकॉर्ड के कारण उपचार संबंधी विवादों में भी कमी आएगी।

30 अगस्त के बाद कार्रवाई संभव

योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार राज्य के सभी शासकीय अस्पतालों के साथ लगभग 600 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत हैं। इन सभी अस्पतालों के लिए 30 अगस्त तक एबीडीएम सॉफ्टवेयर लागू करना अनिवार्य किया गया है।

यदि कोई अस्पताल निर्धारित समय तक इस व्यवस्था को लागू नहीं करता है तो एनएबीएल मान्यता प्राप्त अस्पतालों का 15 प्रतिशत इंसेंटिव भुगतान रोका जा सकता है। इसके अलावा आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल उनकी मान्यता भी प्रभावित हो सकती है।

रायपुर में दो वर्षों में ₹1,211 करोड़ का इलाज

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत प्रदेश में सबसे अधिक उपचार रायपुर जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में हो रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 210 निजी अस्पताल योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं। इन अस्पतालों में पिछले दो वर्षों के दौरान लगभग ₹1,211 करोड़ की लागत से हितग्राहियों का उपचार किया गया।

उपचार के एवज में अस्पतालों को अब तक लगभग ₹910 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, जबकि करीब ₹217 करोड़ की राशि का भुगतान अभी शेष है।

मान्यता के इंतजार में कई अस्पताल

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई नए निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़ने के लिए आवेदन कर चुके हैं और विभागीय स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हाल ही में रायपुर जिले के तीन बड़े अस्पतालों को आयुष्मान योजना की सूची में शामिल किया गया है।

वहीं, योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई भी जारी है। हाल ही में एक अस्पताल को आयुष्मान योजना के हितग्राही के उपचार में निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने के कारण तीन माह के लिए योजना से निलंबित किया गया है।

डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एबीडीएम प्लेटफॉर्म लागू होने से आयुष्मान योजना का संचालन अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित होगा। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने के साथ अस्पतालों की क्लेम प्रक्रिया भी सरल होगी और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

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