प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की और उनके अदम्य साहस, बलिदान तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का पराक्रम और त्याग देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने नागरिकों से शहीदों के बलिदान को याद रखने और राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। ‘मन की बात’ कार्यक्रम पिछले कई वर्षों में केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का मंच नहीं रहा है। यह समाज, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, स्वच्छता, लोक परंपराओं और देशभर के प्रेरणादायक व्यक्तियों की कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
PM मोदी ने की कोरबा के वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल की तारीफ
वहीं इस बार मन की बात में पीएम मोदी ने जल संचयन के महत्व को दोहराते हुए ‘कैच द रेन’ अभियान की सराहना की और कोरबा मॉडल के सराहना की और नागरिकों से बारिश के पानी को सहेजने का आग्रह किया. औद्योगिकीकरण और तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण के बीच कोरबा जिले ने भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए एक नजीर पेश की है. बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए चलाए जा रहे महाअभियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चर्चित रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जमकर तारीफ की है.
भविष्य के जल संकट का बताया पक्का इलाज
जल संकट से निपटने के लिए बारिश के पानी को सहेजने की अनूठी मुहिम शुरू की गई है. केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ और राज्य के ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन और नगर पालिक निगम कोरबा वॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं. बारिश की हर बूंद को जमीन के भीतर उतारने के लिए शहर से लेकर वनांचल तक चौतरफा प्रयास जारी हैं.
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में जल संरक्षण को जनभागीदारी का सबसे बड़ा अभियान बताया. उन्होंने कहा कि 4 जुलाई से देशभर में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को नई गति दी जा रही है.
प्रधानमंत्री ने खुशी जताई कि गांवों, शहरों, पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया है. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी के संरक्षण की जिम्मेदारी लें और पानी की हर बूंद बचाने का संकल्प लें, क्योंकि आज बचाया गया पानी आने वाली पीढ़ियों की सबसे बड़ी पूंजी बनेगा.


















