रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के विजन को अब गति मिलने लगी है। मुख्य सचिव विकास शील की पहल पर भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के सहयोग से नवा रायपुर में पांच खेलों के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। खेल विभाग ने इसका औपचारिक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, दिल्ली में आयोजित चिंतन शिविर के दौरान मुख्य सचिव विकास शील ने साई के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद जुलाई के पहले सप्ताह में साई की टीम ने रायपुर, बस्तर, सरगुजा और नवा रायपुर का दौरा कर खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं का आकलन किया।
निरीक्षण के बाद नवा रायपुर में कयाकिंग-केनोइंग, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, आर्चरी तथा बॉक्सिंग या जूडो में से एक खेल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने पर सहमति बनी है। खेल संचालक तनुजा सलाम ने प्रस्ताव खेल सचिव यशवंत कुमार को भेज दिया है।
खेल सचिव ने बताया कि उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना पर विशेष जोर दे रहे हैं। सेक्टर-28 में विकसित हो रहे आधुनिक खेल परिसर और पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के कारण नवा रायपुर इस परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है।
इसके अलावा बस्तर, सरगुजा और नवा रायपुर में वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो, कयाकिंग-केनोइंग, वुशू, आर्चरी और एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेलों के राज्य प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) विकसित करने की भी योजना है। आर्चरी और एथलेटिक्स के मौजूदा प्रशिक्षण केंद्रों को देखते हुए तलवारबाजी जैसे अन्य व्यक्तिगत ओलंपिक खेलों को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं सरगुजा में कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की भी तैयारी है।
सरकार की रणनीति इस बार व्यक्तिगत ओलंपिक खेलों को प्राथमिकता देने की है, ताकि छत्तीसगढ़ से अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक पदक विजेता तैयार किए जा सकें।
वहीं नवा रायपुर के सेंध जलाशय को कयाकिंग-केनोइंग के राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण केंद्र के रूप मंं विकसित किया जाएगा, जबकि राजधानी के बूढ़ातालाब को साई के सहयोग से फीडर सेंटर बनाया जाएगा। हाल ही में सेंध जलाशय में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान खेल मंत्री अरुण साव ने इस खेल की संभावनाओं का भी जायजा लिया था।-


















