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लबालब हुए छत्तीसगढ़ के जलाशय, औसत जलभराव 87 फीसदी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते एक पखवाड़े के दौरान हुई जोरदार बारिश से प्रदेश के अधिकांश जलाशय लबालब हो गए हैं। बड़े, मध्यम और छोटे बांधों में जलभराव की स्थिति बेहतर हुई है। कई जलाशय 100 फीसदी तक भर चुके हैं। कुछ बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बावजूद जलस्तर में मामूली कमी आई है। अगस्त के पहले 15 दिनों में ही प्रदेश के जलाशयों के औसत जलभराव में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 87 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है।

प्रदेश के सभी संभागों में अच्छी बारिश का असर जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। वृहद जलाशयों में मुंगेली जिले का मनियारी, बिलासपुर का खारंग और महासमुंद जिले का कोडार बांध 100 फीसदी तक भर चुका है। खासकर कोडार

बांध कई वर्षों बाद इस स्तर तक पहुंचा है।

धमतरी जिले के रविशंकर जलाशय में भी जलभराव करीब 85 फीसदी है। कुछ दिन पहले जलाशय के लबालब होने के बाद पानी छोड़ा गया था। वहीं गंगरेल के दोनों लिंकिंग डैम में जलभराव करीब 88 फीसदी तक पहुंच गया है। गंगरेल में पिछले 15 दिनों के दौरान करीब 18 फीसदी जलभराव बढ़ा है।

कोरबा जिले का मिनीमाता बांगो जलाशय भी लबालब होने के बाद इसके गेट खोले गए हैं। इसके बावजूद जलाशय में करीब 94 फीसदी पानी मौजूद है। सिकासार और दुधावा जलाशयों में भी 95 फीसदी से अधिक जलभराव के बाद पानी छोड़ा गया था।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सितंबर तक जलाशयों में जलभंडारण की स्थिति बेहतर रहने की संभावना है। अच्छी स्थिति में जलभंडारण होने से आगामी वर्ष के लिए भी पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता कम होने की उम्मीद है।

दो साल की तुलना में बेहतर स्थिति

इस वर्ष 16 अगस्त तक प्रदेश के जलाशयों में जलभंडारण की स्थिति पिछले दो वर्षों की तुलना में बेहतर है। वर्ष 2024 में 16 अगस्त तक बांधों का औसत जलभंडारण करीब 80 फीसदी था। वहीं वर्ष 2025 में इसी अवधि में औसत जलभंडारण 74 फीसदी दर्ज किया गया था। इस वर्ष यह बढ़कर 87 फीसदी तक पहुंच गया है।

मध्यम और लघु बांध भी लबालब

प्रदेश के मध्यम और लघु जलाशयों में भी पानी की स्थिति तेजी से सुधरी है। अब चार-पांच ही ऐसे जलाशय हैं, जहां औसत जलभंडारण 50 फीसदी से कम है। राजनांदगांव जिले का मोंगरा बैराज इसका उदाहरण है। यहां 22 जुलाई तक जलस्तर शून्य फीसदी था, जो अब बढ़कर करीब 78 फीसदी तक पहुंच गया है।

हालांकि कांकेर जिले के मायना जलाशय में स्थिति अभी अपेक्षाकृत कमजोर है। यहां करीब 33 फीसदी ही जलभराव दर्ज किया गया है। बिलासपुर और राजनांदगांव जिले के कई जलाशय 100 फीसदी जलभंडारण तक पहुंच चुके हैं।

31 जुलाई से 16 अगस्त के बीच बढ़ा जलस्तर

मिनीमाता बांगो में जलभराव 83.35 फीसदी से बढ़कर 94.19 फीसदी, गंगरेल में 67.82 से 85 फीसदी, तांदुला में 66.58 से 74.99 फीसदी और दुधावा में 93.59 से 76.76 फीसदी दर्ज किया गया। सिकासार में 93.97 से 76.74 फीसदी, खारंग में 100 फीसदी से 100 फीसदी, सोंदूर में 84.56 से 80.16 फीसदी और मुरूमसिल्ली में 84.33 से 88.98 फीसदी जलभराव दर्ज हुआ।

इसी तरह कोडार बांध में जलभराव 87.90 फीसदी से बढ़कर 100 फीसदी और मनियारी जलाशय में भी 100 फीसदी तक पहुंच गया। दूसरी ओर केलो बांध में 40.45 से 34.33 फीसदी और अरपा भैंसाझार में 25.14 से 44.96 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया। कई जलाशयों में पानी छोड़ने के कारण 31 जुलाई की तुलना में 16 अगस्त को जलस्तर कम भी दर्ज हुआ है।

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