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जिन पितरों को कहीं नहीं मिलती मुक्ति, उन्हें भी यहां मिलता है मोक्ष

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मृत व्यक्ति की मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान करने का विशेष महत्व है. इसमें भी गया, पुष्कर, प्रयागराज, हरिद्वार, काशी आदि तीर्थों में पिंडदान करने का विशेष महत्व है. लेकिन स्कंद पुराण के अनुसार बद्रीनाथ तीर्थ के अलकनंदा नदी के तट पर स्थित ‘ब्रह्मकपाल’ क्षेत्र में श्राद्ध के दिनों में किया गया पिंडदान ‘गया’ तीर्थ में किए गए पिंडदान से आठ गुना अधिक पुण्यदायी है. ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ में ब्रह्मकपाल में अंतिम श्राद्ध किया जाता है. इसके पश्चात संबंधित व्यक्ति के निमित्त किसी भी प्रकार का श्राद्ध कर्म या पिंडदान नहीं किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जिन पितरों को गया में श्राद्ध करने पर भी मुक्ति नहीं मिलती, उनका श्राद्ध यहां करने पर उन्हें मुक्ति मिल जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा यहां ब्रह्मकपाल के रूप में निवास करते हैं. अलकनंदा नदी के तट पर ब्रह्माजी के पाचवें सिर की आकृति की शिला आज भी मौजूद है.

श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार पांडवों ने अपने कुल के नाश के दोष से मुक्ति पाने के लिए स्वर्गारोहण के समय ब्रह्मकपाल में ही अपने पितरों का तर्पण किया था. ब्रह्मकपाल की पितरों की मोक्ष प्राप्ति के सर्वोच्च तीर्थ के रूप में महत्ता है. गरुड़ पुराण के अनुसार ब्रह्मकपाल में अपने पितरों का पिंडदान व तर्पण करने से उसके कुल के सभी पितृ मुक्त होकर ब्रह्मलोक चले जाते हैं.

‘ब्रह्मकपाल’ भगवान बद्रीनाथ के चरणों पर बसा है. इसलिए इस स्थान पर पिंडदान करने से मृत आत्मा को तत्काल मोक्ष मिल जाता है. इस तीर्थ की इतनी महत्ता के पीछे एक कथा है. एक बार ब्रह्मा जी ने भगवान शिव के सामने झूठ बोल दिया. इससे क्रोधित होकर शिव ने ब्रह्मा जी का वह मुख काट दिया, जिससे उन्होंने झूठ बोला था. इस तरह ब्रह्मा जी के पांच की जगह चार मुख रह गए, जो चार वेदों के प्रतीक माने जाते हैं. लेकिन ब्रह्मा जी का वह कटा हुआ सिर भगवान शिव के हाथ से चिपक गया. काफी प्रयत्न करने के बाद भी वह सिर अलग नहीं हुआ. इस कोशिश में जब शिव बद्रीनाथ में एक समतल स्थान पर पहुंचे तो उनके हाथ से ब्रह्मा जी का कटा हुआ सिर अलग हो गया. उस समय से ही इस स्थान का नाम ‘ब्रह्मकपाल’ हो गया. भगवान शिव ने इस स्थान को वरदान देते हुए कहा जो व्यक्ति इस स्थान पर अपने पूर्वजों का पिंडदान करेगा, उसे सीधा मोक्ष मिलेगा.

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