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अंतिम चरण में पहुंचा प्रोजेक्ट ‘सूर्य तिलक’ का काम

रुड़की. अयोध्या में प्रोजेक्ट ‘सूर्य तिलक’ का काम अंतिम चरण में है. निर्माणाधीन राम मंदिर में इस प्रोजेक्ट के तहत मकर संक्रांति पर भगवान रामलला की प्रतिमा के ललाट पर सूर्य की पहली किरण तिलक करेगी. सीबीआरआई रुड़की के वैज्ञानिक राम मंदिर के इस सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं.

मंदिर के डिजाइन और कुछ विशिष्ट प्रकार के उपकरणों की मदद से प्रोजेक्ट ‘सूर्य तिलक’ को साकार किया जाना है. केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक देवदत्त घोष के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का काम अंतिम चरण में है. जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा.

सीबीआरआई के वैज्ञानिकों की एक अलग टीम इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. मालूम हो कि 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम मंदिर का उद्घाटन होना है. इस कार्यक्रम को भव्य रूप देने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं.

अनुष्ठान के लिए सिले जा रहे पारंपरिक परिधान

प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के लिए भगवान के पारम्परिक परिधान की सिलाई भी शुरू हो गई है. रामलला की खानदानी सेवा में 38 सालों से कार्यरत भगत प्रसाद श्रीवास्तव और शंकर लाल श्रीवास्तव नवीन मंदिर में विराजित होने वाले रामलला के विग्रह के परिधानों को सुसज्जित करने को लेकर अति उत्साहित हैं. हालांकि रामलला के तीन विग्रहों में से प्रमुख विग्रह जिन्हें राम मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाना है कि अधिकृत नाप श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से नहीं दी गई है.

एक हजार साल तक अडिग रहेगा मंदिर

सीबीआरआई के वैज्ञानिक देवदत्त घोष के अनुसार मंदिर के ढांचे का पूरा खाका डॉ. मनोजी सामंता, बी सिन्हा गुप्ता के नेतृत्व में पूरा किया गया है. डिजाइन और शेष मंदिर का डिजाइन अलग-अलग है. एक हजार साल को ध्यान में रखते हुए इसका निर्माण किया जा रहा है.

राम मंदिर का मॉडल सीबीआरआई परिसर में भी रखा गया है. अभी हाल ही में आउटरीच कार्यक्रम के तहत कैंपस में स्कूली छात्रों को भी इससे रूबरू कराया गया. सीबीआरआई के विशेषज्ञों ने बच्चों को मंदिर की इमारत और उसकी इंजीनियरिंग की जानकारी भी दी.

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