रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला लगातार जारी है। वहीं, खरीदी केन्द्रों में कई तरह अव्यवस्थाएं भी देखी जा रही हैं। धान का उठाव नहीं होने के कारण ज्यादातर समितियों में धान रखने के लिए जगह नहीं है। डीओ नहीं कटने के कारण मिलर्स समितियों से धान का उठाव ही नहीं कर रहे हैं। इसके फलस्वरूप समितियों में धान जाम हो गया है और धान खरीदी की रफ्तार धीमी हो गई है। यदि कुछ दिन और यही स्थिति रही तो कई समितियों में धान खरीदी का कार्य ठप होने की आशंका है। वहीं, दूसरी ओर टोकन के लिए किसानों में मारामारी है। जरूरतमंद किसानों को धान बेचने के लिए समय पर टोकन नहीं मिल पा रहा है। समितियों में न तो ऑफलाइन और न ही ‘टोकन तुहर एप्प’ से ऑनलाइन टोकन किसानों को मिल पा रहा है। इसके चलते किसानों को धान बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसान समितियों में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले हफ्ते से टोकन के लिए प्रयासरत कर रहे हैं, लेकिन न तो ऑफलाइन से टोकन मिल पा रहा है और न ही ऑनलाइन। ऐसे में उनके पास इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वहीं, समितियों के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन की क्षमता के आधार पर किसानों को टोकन दिए जा रहे हैं। उठाव नहीं होने के कारण धान जाम हो गया है और खरीदी कार्य प्रभावित हो रहा है। राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों का करोड़ों रुपए का भुगतान बकाया है। शासन को लंबित राशि का भुगतान जल्द करना चाहिए। पंजीकृत मिलर्स धान की मिलिंग के लिए तैयार है।
भुगतान के लिए 26,200 करोड़ की बैंक गांरटी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार धान खरीदी के साथ-साथ किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान भी शुरू कर दिया गया है। किसानों से क्रय किए गए धान के मूल्य भुगतान के लिए राज्य सरकार ने मार्कफेड को 26,200 करोड़ रुपए की बैंक गांरटी पहले से दे रखी है। धान खरीदी की व्यवस्था पर निगरानी के लिए सभी केन्द्रों में अधिकारी तैनात किए गए हैं। राज्य स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारी लगातार दौरा कर खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
गड़बड़ी रोकने कड़ी निगरानी हो रही
राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने पाए इसको लेकर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बाहर से धान की आवक की रोकथाम के लिए चेकपोस्ट पर अधिकारी तैनात किए गए हैं। जगह-जगह मॉलवाहकों की औचक जांच भी की जा रही है। राज्य सरकार अपने घोषणा के अनुरूप प्रति एकड़ 21 क्विंटल समर्थन मूल्य और कृषि उन्नति योजना के तहत 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है।
23 दिन में मात्र 22.39 लाख मीट्रिक टन की खरीदी
मार्कफेड के मुताबिक पूरे प्रदेश में पिछले 15 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महाअभियान के तहत अब तक 22 लाख 39 हजार 433 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। 4 लाख 39 हजार 511 पंजीकृत किसानों ने धान बेचा है। धान खरीदी के एवज किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत भुगतान के लिए मार्कफेड द्वारा 5277 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। चालू खरीफ सीजन के लिए 27 लाख 30 हजार 96 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिसमें 31 लाख 51 हजार 771 हेक्टेयर रकबा शामिल है।
महासमुंद में सर्वाधिक खरीदी
राज्य में सभी जिलों में धान खरीदी जारी है। महासमुंद जिला सर्वाधिक 15 लाख 19 हजार 650 क्विंटल धान खरीदकर पहले पायदान पर है। वहीं, गरियाबंद जिला 6 लाख 73 हजार 495 क्विंटल धान खरीदकर दूसरे नंबर पर है। बिलासपुर जिले ने 6 लाख 73 हजार 65 क्विंटल धान खरीदकर तीसरे स्थान हासिल किया है। कांकेर में 6 लाख 15 हजार 431 क्विंटल, धमतरी व मुंगेली जिले में पांच लाख क्विंटल, सूरजपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, बेमेतरा, बालोद व कोण्डागांव में चार लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी शामिल हैं।
अब तक 8.97 लाख टोकन जारी
किसानों को अब तक 8 लाख 97 हजार 779 टोकन जारी किए गए हैं। वहीं आगामी दिवस 8 दिसंबर को धान खरीदी के लिए किसानों को 50 हजार 234 टोकन जारी हुए हैं। टोकन तुहर एप आनलाइन व्यवस्था से किसानों को काफी सुविधा मिल रही है। राज्य और जिला स्तरीय दलों द्वारा प्रदेश सहित सीमावर्ती इलाकों में अवैध धान परिवहन, भंडारण तथा विक्रय पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
सभी केन्द्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी जारी है। किसानों को धान बेचने में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी केन्द्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। जिन केन्द्रों में धान की बंपर आवक व डीओ रिक्वेस्ट किए जा रहे हैं, वहां कलेक्टर के माध्यम से डीओ काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। धान मिलिंग कार्य के लिए 12 सौ से अधिक राइस मिलर्स का पंजीयन भी हो चुका है।
- जितेंद्र शुक्ला, प्रबंध संचालक, मार्कफेड


















