पिछले डेढ़ महीने में चांदी ने रफ्तार दिखाई है, उसने निवेशकों को चौंका दिया है। इस दौरान एमसीएक्स पर चांदी करीब 50% तक उछल चुकी है और अब सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक तेज रैली है या इसके पीछे कोई गहरी वजह छिपी है? हकीकत यह है कि यह उछाल बल्कि अफवाहों या सट्टेबाजी का नतीजा नहीं, वैश्विक स्तर पर चांदी की भूमिका में आए बड़े बदलाव का संकेत है। फिलहाल इस सुपर रैली के बाद निवेशकों को चांदी में क्या करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि चांदी 2026 में भी निवेशकों की चांदी करवाएगी, लेकिन इसके लिए लोगों को संभलकर निवेश करना होगा और रणनीति बनानी होगी, ताकि बाद में पछताना न पड़े। सर्राफा बाजार के जानकारों का कहना है कि चांदी की भूमिका वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। अगर इंडस्ट्रयल डिमांड और सप्लाई की बनी रहती है, तो अगले 1-2 साल में 90-100 डॉलर प्रति औंस की ओर बढ़त संभव है। यह निवेशकों को मालामाल कर सकती है।
चांदी की भूमिका में बड़ा बदलाव
जानकारों का कहना है कि कई सालों तक चांदी को या तो गहनों के लिस मेटल माना गया या फिर ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला मेटल, लेकिन अब यह सोच बदल चुकी है। आज चांदी रणनीतिक इंडस्ट्रयल मेटल बन चुकी है। रिन्यूएबल एनर्जी, इलेवट्रिफिकेशन, डिजिटल इकॉनमी और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों ने चांदी को उत्पादन के लिए अनिवार्य बना दिया है। यही वजह है कि इसकी मांग अब अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी बनती जा रही है।
इंडस्ट्रयल डिमांड क्यों है मजबूत
चांदी की सबसे बड़ी ताकत है इसकी बेहतरीन इलेक्ट्रकल कंडक्टिविटी, जो इसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, पावर ग्रिड और डिफेंस सिस्टम्स में बेहद जरूरी बनाती है। इन क्षेत्रों में कीमत से ज्यादा भरोसे और प्रदर्शन को अहमियत दी जाती है। इसका मतलब यह है कि दाम बढ़ने के बावजूद कंपनियां चांदी खरीदना बंद नहीं कर सकतीं। इसी वजह से चांदी की मांग अब प्राइस इनेलास्टिक हो गई है और गिरावट पर तुरंत सपोर्ट देखने को मिलता है।
ये रैली, पिछली रैलियों से क्यों अलग
लंबे समय तक चांदी की कीमतें फ्यूचर्स और पेपर ट्रेडिंग से तय होती रहीं, लेकिन जैसे ही ग्लोबल स्तर पर दाम संवेदनशील स्तरों तक पहुंचे, फिजिकल उपलब्धता का सवाल खड़ा हो गया। सप्लाई टाइट हुई, सेलर्स पीछे हटे और खरीदार मजबूर होकर ऊंचे दाम पर खरीदने लगे. नतीजा तेज सिंगल-डे मूव्स और लगातार ऊंची क्लोजिंग, जो यह दिखाते हैं कि बाजार अब राय नहीं, बल्कि हकीकत के आधार पर कीमत तय कर रहा है। आगे चलकर चांदी में संभावनाएं बनी हुई हैं। अगर इंडस्ट्रयल डिमांड और सप्लाई की कमी बनी रहती है, तो अगले 1-2 साल में 90-100 डॉलर प्रति औंस की ओर बढ़त संभव है, लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि चांदी बेहद अस्थिर (वोलेटाइल) कमोडिटी है। 1980 और 2011 की तरह तेज रैली के बाद गहरी गिरावट भी आ सकती है। लंबे समय में 40 डॉलर प्रति औंस एक अहम सपोर्ट जोन माना जाता है। इसलिए चांदी में निवेश मौका जरूर है, लेकिन बिना रणनीति और जोखिम प्रबंधन के निवेश रिस्की हो सकता है।
चांदी में निवेश के विकल्प
- फिजिकल चांदी: आप बाजार से चांदी के सिक्के, गहने या बार खरीद सकते हैं। इसमें चोरी या शुद्धता की चिंता रहती है, इसलिए बीआईएस हॉलमार्ड चांदी ही खरीदना चाहिए।
- सिल्वर ईटीएफ : ये एक ऐसा फंड है जो चांदी की कीमतों पर आधारित है। इसमें पैसा चांदी की कीमत के हिसाब से बढ़ता-घटता है। ये स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह ट्रेड होते हैं।
- म्यूचुअल फंड्स : चांदी से जुड़े म्यूचुअल फंड्स भी अच्छे विकल्प हैं। कमोडिटी फंड, खनन कंपनियों के शेयर और एमसीएक्स फ्यूचर्स-ऑप्शन्स भी विकल्प हैं।
- सोवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) की तरह सिल्वर बॉन्ड : सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं, जो चांदी की कीमतों से जुड़े होते हैं।
- चांदी के शेयर : चांदी की खनन करने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं, जैसे कि फर्स्ट मैजेस्टिक सिल्वर कॉर्प, पैन अमेरिकन सिल्चर कॉर्प और एंडेवर सिल्वर कॉर्प।

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