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गणतंत्र दिवस के निमंत्रण किट में दिखेगी पूर्वोत्तर की कला, 200 कारीगरों ने तैयार की सांस्कृतिक विरासत

रायपुर। आगामी गणतंत्र दिवस समारोह के लिए तैयार किए गए विशेष निमंत्रण किट इस बार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (नॉर्थ ईस्ट) की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत की चमक बिखेरेंगे। पूर्वोत्तर की पारंपरिक कलाओं से सजे कुल 950 निमंत्रण किट राष्ट्रपति भवन को सौंप दिए गए हैं। इन किट्स को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद के मार्गदर्शन में लगभग 45 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया गया है।

350 लोगों की मेहनत, 8 राज्यों की झलक

इस विशेष परियोजना में 200 स्थानीय कारीगरों के साथ-साथ एनआईडी के लगभग 150 संकाय सदस्यों, छात्रों और पूर्व छात्रों ने योगदान दिया है। प्रत्येक किट में पूर्वोत्तर के आठों राज्यों की विशिष्ट कलाकृतियों को शामिल किया गया है। इसमें हैंडलूम टेक्सटाइल, बांस की बुनाई, शुगु शेंग पेपर, ब्लैक पॉटरी और पारंपरिक गोगाना वाद्ययंत्र जैसी चीजें शामिल हैं। किट में इस्तेमाल किए गए बांस के मैट और तीन रंगों के धागों से बने अष्टकोणीय पैटर्न क्षेत्र की ‘बैकस्ट्रैप लूम’ तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को दर्शाते हैं।

किट के भीतर प्रत्येक राज्य की संस्कृति को खास जगह दी गई है

  • सिक्किम: कंचनजंगा कढ़ाई की खूबसूरती।
  • मेघालय: बारिश से बचाव की तकनीक से प्रेरित बांस की छत के मॉडल
  • अरुणाचल प्रदेश: मिथुन बैल की आकृति वाला शुगु शेंग पेपर
  • असम: बांस से निर्मित पारंपरिक गोगाना वाद्ययंत्र
  • त्रिपुरा: बांस के सजावटी हस्तशिल्प
  • मिजोरम: पारंपरिक पुआन ची शॉल
  • मणिपुर: ‘शिरुई लिली’ की आकृति वाली काली मिट्टी के बर्तन

स्थानीय संसाधनों का उपयोग

एनआईडी अहमदाबाद की प्रोफेसर एंड्रिया नोरोन्हा के मुताबिक इस पहल का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता और सौंदर्य बनाए रखते हुए पूर्वोत्तर की विविधता को प्रदर्शित करना था। कारीगरों ने अपने गांवों से ही स्थानीय सामग्री जुटाई, जबकि एनआईडी ने डिजाइन और असेंबली का समन्वय किया। यह किट न केवल मेहमानों का स्वागत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सर्कुलर इकोनॉमी और टिकाऊ विकास के संदेश को भी मजबूती से रखेगी।

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