नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि बदले सामाजिक परिवेश में बच्चों के लिए मां की परवरिश और पिता की कमाई के सिद्धांत (ट्रेंडर ईयर्स डॉक्टराईन) की सोच बदलनी होगी। साथ ही कामकाजी मां को भी बच्चों की परवरिश का खर्च देने के आदेश दिए।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल एवं न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथ शंकर की पीठ ने संबंधित मामले का हवाला देते हुए कहा कि मां विदेश में नौकरी कर रही है। पिता बेशक कम कमाता है, लेकिन बच्चों की देखभाल के लिए उसका संरक्षण होना सही है। पीठ ने यह भी कहा कि पिता को बच्चे की कस्टडी दिए जाने का मतलब यह बिलकुल भी नहीं निकाला जाएगा कि मां की भूमिका या जिम्मेदारी कम हो गई है। मां भी बच्चे की परवरिश के लिए खर्च साझा करे। बच्चे पिछले तीन वर्षों से अपने नाना-नानी के साथ रह रहे हैं।



















