इंफाल। फुटहिल्स नगा कोऑर्डिनेशन कमेटी ने कुकी सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें के. सोंग्लुंग नामक गांव को जलाने का दावा किया गया था। एफएनसीसी ने स्पष्ट किया कि वहां किसी भी मान्यता प्राप्त गांव को निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि केवल अफीम की खेती के लिए इस्तेमाल हो रहे अवैध फार्महाउसों को गिराया गया है।
आधिकारिक रिकॉर्ड में गांव का अस्तित्व नहीं
एफएनसीसी ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि मणिपुर गजट या आधिकारिक दस्तावेजों में “के. सोंग्लुंग” नाम की किसी बस्ती का उल्लेख नहीं है। मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्र ग्राम प्राधिकरण) अधिनियम, 1956 का हवाला देते हुए समिति ने बताया कि किसी भी बस्ती को गांव की मान्यता मिलने के लिए कम से कम 20 घर होने अनिवार्य हैं। वहां जो ढांचे गिराए गए, वे नगा पैतृक भूमि पर अफीम की खेती के लिए बनाए गए अस्थायी शेल्टर मात्र थे।
ऐतिहासिक भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप
समिति ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि यह भूमि मूल रूप से टैम्फोइमोन (इनपुई गांव) की है। 1918 के कुकी विद्रोह के दौरान खाली हुई यह जमीन वाफोंग इंथान इनपुई गांव के अधिकार क्षेत्र में आती है। आरोप है कि यहां रहने वाले लोग 2017 में आए और जंगल काटकर अवैध रूप से अफीम की खेती शुरू कर दी। राज्य सरकार और अन्य संस्थाओं की बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद इन गतिविधियों को नहीं रोका गया।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई का दिया हवाला
कुकी संगठनों के उन दावों को भी खारिज किया गया जिनमें इलाके में अफीम की खेती न होने की बात कही गई थी। एफएनसीसी ने बताया कि 2, 8 और 20 नवंबर 2025 को राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से यहां अफीम के बागानों को नष्ट किया था। ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट की हालिया कार्रवाई भी इसी नशा-विरोधी अभियान का हिस्सा थी।
शांति और संयम की अपील
संपत्ति के नुकसान पर दुख जताते हुए एफएनसीसी ने स्पष्ट किया कि अवैध अफीम की खेती क्षेत्र के लिए सामाजिक और सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा है। समिति ने कुकी संगठनों द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी गलत सूचनाएं संघर्ष को भड़का सकती हैं। उन्होंने सभी समुदायों से पैतृक सीमाओं का सम्मान करने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने का आह्वान किया है।



















