कोहिमा। नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने राज्य के ऊंचे पहाड़ी जंगलों में पौधों की एक नई प्रजाति की पहचान की है। ‘होया नागोंसिस‘ (Hoya nagaensis) नाम की यह खोज न केवल क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है, बल्कि संरक्षण में स्थानीय समुदायों द्वारा प्रबंधित वनों के महत्व को भी रेखांकित करती है।
फेक जिले में मिली एकमात्र साइट
डॉ. ग्याती याम (सहायक प्रोफेसर, वानिकी विभाग) के नेतृत्व में शोधकर्ता विएनीते-ओ कोजा और जॉयनाथ पेगु ने इस प्रजाति को खोजा है। यह पौधा फिलहाल केवल फेक (Phek) जिले के ‘कावुनहोउ सामुदायिक आरक्षित वन’ में पाया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रजाति की पत्तियों और फूलों की बनावट ‘होया’ वंश की अन्य प्रजातियों से काफी अलग और विशिष्ट है।
अत्यंत लुप्तप्राय (Critically Endangered) श्रेणी में
सीमित वितरण और झूम खेती जैसे खतरों के कारण, शोधकर्ताओं ने ‘होया नागाेंसिस’ को अस्थायी रूप से ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ श्रेणी में रखा है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जगदीश कुमार पटनायक ने कहा कि यह खोज पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक स्तर पर जैव विविधता का केंद्र साबित करती है।
सामुदायिक संरक्षण का कमाल
डॉ. याम ने बताया कि इस प्रजाति का अस्तित्व नागा समुदायों की पारंपरिक वन प्रबंधन प्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
“वैज्ञानिकों के लिए अभी भी नागालैंड का बड़ा वन क्षेत्र अनछुआ है। यह खोज दर्शाती है कि सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित ठिकाने हैं।”
भविष्य की योजना
यह शोध एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अब टीम इस पौधे की पारिस्थितिकी, परागण जीव विज्ञान (Pollination Biology) और भविष्य के संरक्षण जोखिमों का अध्ययन करने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अन्य अज्ञात प्रजातियों की तलाश जारी रखेगी।



















