रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए सरकार ने थानों का जाल तो बिछा दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि ये थाने ‘शक्तिविहीन’ नजर आ रहे हैं। राज्य के 15 साइबर थानों में से 14 में कानूनी रूप से जांच करने के लिए अधिकृत ‘निरीक्षक’ (Inspector) का पद ही स्वीकृत नहीं है। नतीजा यह है कि कार्रवाई साइबर एक्सपर्ट कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट मं( कागजों पर दस्तखत के लिए जिले के सामान्य थानों के प्रभारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
कानूनी पेंच: बिना इंस्पेक्टर जांच ‘अवैध’
नियमों के मुताबिक, साइबर फ्रॉड के मामलों की जांच कम से कम निरीक्षक स्तर का अधिकारी ही कर सकता है। पीएचक्यू (PHQ) के स्टेट साइबर थाने को छोड़ दें तो प्रदेश के बाकी 14 थानों में यह पद कागजों पर है ही नहीं।
• जुगाड़ की कार्रवाई: वर्तमान में आईजी के निर्देश पर रेंज थानों में पदस्थ निरीक्षक जांच तो कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट में चालान पेश करने का अधिकार न होने के कारण दूसरे थानों से मदद लेनी पड़ रही है। इससे केस की कानूनी मजबूती पर भी सवाल उठ सकते हैं।
19 महीने बाद जागी सरकार, फिर भी अधूरा सेटअप
साइबर थानों की घोषणा और उनके लोकार्पण के बीच की सुस्ती भी चौंकाने वाली है:
• घोषणा और देरी: 2024-25 के बजट में घोषित थानों की अधिसूचना जारी करने में ही गृह विभाग को 19 महीने (अक्टूबर 2025) लग गए।
• लोकार्पण का शोर: 28 जनवरी को मुख्यमंत्री ने वर्चुअली 8 थानों का लोकार्पण किया, लेकिन इन थानों के लिए स्टाफ की मंजूरी की फाइल अब भी धूल फांक रही है।
खतरनाक आंकड़े: 5 जिलों के सिम से देशभर में 8 हजार ठगी
साइबर ठग किस कदर सक्रिय हैं, इसे रायपुर रेंज के इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
• ब्लॉक सिम: रायपुर रेंज के 5 जिलों में पुलिस ने 14,000 फर्जी सिम और 1,000 मोबाइल फोन ब्लॉक कराए हैं।
• नेशनल फ्रॉड: इन्हीं सिम के जरिए देशभर में 8,000 शिकायतें केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज हैं।
• रायपुर पुलिस का एक्शन: ऑनलाइन फ्रॉड के 106 मामलों में रायपुर साइबर पुलिस ने 13 राज्यों में दबिश देकर 415 ठगों को गिरफ्तार किया है।
क्या होती है इससे समस्या
• दिक्कत: जांच का अधिकार निरीक्षक को, लेकिन पद ही स्वीकृत नहीं।
• विवाद: रायपुर रेंज के थानों में निरीक्षक तो हैं, लेकिन स्वीकृत पद न होने से वे चालान पेश नहीं कर पा रहे।
• लोकार्पण: गृहमंत्री विजय शर्मा ने जनवरी में कबीरधाम और सीएम ने 28 जनवरी को 8 अन्य थानों का लोकार्पण किया।
• चुनौती: बिना अधिकृत स्टाफ के ठगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कोर्ट में टिकना मुश्किल।
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