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Chhattisgarh Power Tender Scam: पावर कंपनी में टेंडर का खेल, चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने वाले तत्कालीन SE को आरोप पत्र

Chhattisgarh Power Tender Scam: रायपुर. छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में नियमों को नजरअंदाज कर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है. राजधानी के नगर वृत्त-एक के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री (SE) मनोज कुमार वर्मा को टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में पावर कंपनी प्रबंधन ने आरोप पत्र जारी किया है. उन पर जुलाई 2022 से 2024 के बीच 100 से ज्यादा टेंडरों में नियम तोड़ने का आरोप है.

अपात्र करने का बनाया नया फॉर्मूला

जांच में सामने आया है कि मनोज कुमार वर्मा ने बिना किसी सक्षम अनुमति के ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के नियम बदल दिए. उन्होंने ऑनलाइन दस्तावेज जमा करने की जगह ऑफलाइन दस्तावेज जमा करने की शर्त जोड़ दी. इसी आधार पर 459 पंजीकृत ठेकेदारों में से 141 ठेकेदारों के टेंडर रद्द कर दिए गए, क्योंकि उन्होंने शुल्क फिजिकल रूप में जमा नहीं किया था.

कम रेट वाले ठेकेदारों को बाहर किया

ई-बिडिंग पोर्टल की जांच में उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे हैं. 12 ऐसे टेंडरों की प्राइस बिड खोली गई, जिन्हें पहले ही रद्द कर दिया गया था. जांच में पाया गया कि जिन ठेकेदारों को बाहर किया गया, उनकी दरें तय राशि से काफी कम थीं. इसके बावजूद चहेते ठेकेदारों को ज्यादा रेट पर काम देकर कंपनी को नुकसान पहुंचाया गया.

नोटशीट में गलत जानकारी दर्ज की

शिकायत के बाद 15 खास टेंडरों की जांच की गई. इसमें पता चला कि नोटशीट में बिड की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी गई थी. बिना किसी दस्तावेज के ई-बिडिंग पोर्टल पर टेक्निकल बिड रद्द कर दी गई. इसके अलावा तय सीमा से ज्यादा राशि की खरीद भी की गई.

सुरक्षा राशि रोकने का आरोप

आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि नियमों के खिलाफ ठेकेदारों की सुरक्षा राशि और ईएमडी रोक कर रखी गई. ठेकेदारों के आवेदन देने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई, जिससे विभाग की छवि खराब हुई. पावर कंपनी के मानव संसाधन विभाग ने इन सभी मामलों में जवाब मांगा है और विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई है.

पावर कंपनी में टेंडर का खेल. चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने वाले तत्कालीन SE को आरोप पत्र

रायपुर. छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में नियमों को नजरअंदाज कर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है. राजधानी के नगर वृत्त-एक के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री (SE) मनोज कुमार वर्मा को टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में पावर कंपनी प्रबंधन ने आरोप पत्र जारी किया है. उन पर जुलाई 2022 से 2024 के बीच 100 से ज्यादा टेंडरों में नियम तोड़ने का आरोप है.

अपात्र करने का बनाया नया फॉर्मूला

जांच में सामने आया है कि मनोज कुमार वर्मा ने बिना किसी सक्षम अनुमति के ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के नियम बदल दिए. उन्होंने ऑनलाइन दस्तावेज जमा करने की जगह ऑफलाइन दस्तावेज जमा करने की शर्त जोड़ दी. इसी आधार पर 459 पंजीकृत ठेकेदारों में से 141 ठेकेदारों के टेंडर रद्द कर दिए गए, क्योंकि उन्होंने शुल्क फिजिकल रूप में जमा नहीं किया था.

कम रेट वाले ठेकेदारों को बाहर किया

ई-बिडिंग पोर्टल की जांच में उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे हैं. 12 ऐसे टेंडरों की प्राइस बिड खोली गई, जिन्हें पहले ही रद्द कर दिया गया था. जांच में पाया गया कि जिन ठेकेदारों को बाहर किया गया, उनकी दरें तय राशि से काफी कम थीं. इसके बावजूद चहेते ठेकेदारों को ज्यादा रेट पर काम देकर कंपनी को नुकसान पहुंचाया गया.

नोटशीट में गलत जानकारी दर्ज की

शिकायत के बाद 15 खास टेंडरों की जांच की गई. इसमें पता चला कि नोटशीट में बिड की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी गई थी. बिना किसी दस्तावेज के ई-बिडिंग पोर्टल पर टेक्निकल बिड रद्द कर दी गई. इसके अलावा तय सीमा से ज्यादा राशि की खरीद भी की गई.

सुरक्षा राशि रोकने का आरोप

आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि नियमों के खिलाफ ठेकेदारों की सुरक्षा राशि और ईएमडी रोक कर रखी गई. ठेकेदारों के आवेदन देने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई, जिससे विभाग की छवि खराब हुई. पावर कंपनी के मानव संसाधन विभाग ने इन सभी मामलों में जवाब मांगा है और विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई है.

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