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चंद्रयान-4 को लेकर ISRO को बड़ी सफलता, मानव मिशन की राह करेगा आसान

चंद्रयान-4 मिशन को लेकर ISRO को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसरो के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (SAC) ने अब तक के सबसे कठिन मून मिशन के लिए लैंडिंग की जगह खोज ली है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लगभग 1 वर्ग किलोमीटर का पैच है जहां चंद्रयान-4 की सफल लैंडिंग करवाई जा सकती है। बता दें कि यह इसरो का पहला रिटर्न मिशन होगा। यानी चंद्रयान-4 को वापस धरती पर भी लाना है।

चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से भजी गई हाई रिजोल्यूशन तस्वीरों से इस जगह को खोजा है जहां चंद्रयान-4 को उतारा जा सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा अध्ययन अमिताभ के सुरेश, अजय के पाराशर, कनन वी अय्यर, अब्दुल एस, श्वेता वर्मा त्रिवेदी और नितांत दुबे ने की है। इस मिशन में प्रोपल्सन मॉड्यूल के अलावा डिसेंटर और असेंडर मॉड्यूल भी होंगे। इसके अलावा ट्रांसफर मॉड्यूल और रीएंट्री मॉड्यूल भी काम करेगा।

यह मिशन भारत के लिए बहुत खास होने वाला है। इसका उद्देश्य चंद्रमा पर लैंडिंग करके मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठे करना और फिर वापस धरती पर लौटना है। इसरो का चंद्रयान -3 मिशन पूरी तरह से सफल हुआ था। इसके बाद इसरो ने यह कठिन कदम उठाने का फैसला किया है। चंद्रयान-4 अगर सफलतापूर्वक वापस लौटता है तो आगे मानव मिशन का भी रास्ता खुल जाएगा।

क्या होगी चंद्रयान- 4 की खासियत

वैज्ञानिकों ने ऑर्बिटर से भेजी गई तस्वीरों में से चार जगहों के बारे में अध्ययन किया था। इसमें एमएम-4 नाम की जगह को सुरक्षित पाया गया है। यह जगह नॉविस माउटन पहाड़ी के पास है लेकिन समतल है। ऐसे में लैंडर को नुकसान पहु्ंचने का खतरा नहीं है। इस जगह पर सूरज की रोशनी भी अच्छी रहती है। ऐसे में लैंडिंग के लिए जगह उपयुक्त है। यहां बड़े गड्ढे ना होने की वजह से लैंडर को चलने में भी आसानी होगी। अब तक के अध्ययन से इतना स्पष्ट हो गया है कि इसी इलाके में चंद्रयान-4 को उतारा जाएगा। यह शिव-शक्ति पॉइंट से बहुत दूर नहीं है। वहीं इस इलाके में गड्ढों के पास अंधेरा रहता है। इसरो का कहना है कि इस इलाके में पानी या बर्फ के सैंपल भी मिल सकतेहैं। इसके अलावा यहां से मिले सैंपल से चंद्रमा के निर्माण और यहां उपस्थिति संसाधनों के बारे में जानकारी मिलेगी।

चंद्रयान-4 कहां उतरेगा

वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से भेजी गई हाई रिजोल्यूशन तस्वीरों के आधार पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चार संभावित स्थानों का गहन अध्ययन किया था। इनमें से एमएम-4 (MM-4) नाम की जगह को चंद्रयान-4 की लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित पाया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक एमएम-4 साइट नॉविस माउटन पहाड़ी के पास स्थित है, लेकिन यह इलाका काफी समतल है। समतल सतह होने की वजह से यहां लैंडर को नुकसान पहुंचने का खतरा बेहद कम माना जा रहा है। साथ ही इस क्षेत्र में सूरज की रोशनी भी पर्याप्त समय तक उपलब्ध रहती है, जो मिशन के संचालन के लिए अहम है।

इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके में बड़े गड्ढे नहीं हैं, जिससे लैंडर और अन्य उपकरणों की मूवमेंट आसान होगी। यही कारण है कि एमएम-4 साइट को लैंडिंग के लिए उपयुक्त माना गया है। अब तक के अध्ययन से यह साफ हो गया है कि चंद्रयान-4 को इसी इलाके में उतारने की योजना बनाई जा रही है। यह स्थान शिव-शक्ति पॉइंट से भी ज्यादा दूर नहीं है। हालांकि, आसपास के कुछ गड्ढों के भीतर अंधेरा रहता है, जहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे इलाकों में पानी या बर्फ के सैंपल मिलने की संभावना अधिक होती है।

इसरो के अनुसार, चंद्रयान-4 के जरिए जुटाए जाने वाले मिट्टी और पत्थरों के सैंपल से चंद्रमा के निर्माण, उसकी भू-रचना और वहां मौजूद संसाधनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। चंद्रयान-4 भारत का पहला रिटर्न मिशन होगा, जिसमें सैंपल इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।

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