खैरागढ़। खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में उस वक्त राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया, जब भाजपा की एक महिला नेत्री ने अपनी ही पार्टी के एक कद्दावर नेता और पूर्व विधायक के खिलाफ यौन शोषण की गंभीर शिकायत दर्ज कराई। छुईखदान थाने में दर्ज इस एफआईआर के बाद से समूचे क्षेत्र और प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है।
पीडि़ता ने पहचान गोपनीय रखने की अपील की
क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय महिला नेत्री ने थाने में लिखित शिकायत के साथ एक पृथक आवेदन भी सौंपा है। इसमें उन्होंने अपना नाम, पता और पहचान संबंधी अन्य विवरणों को पूर्णतः गोपनीय रखने का विनम्र आग्रह किया है। पीडि़ता का कहना है कि प्रकरण की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए यदि उनकी पहचान उजागर होती है, तो उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर खतरा हो सकता है।
आईजी कार्यालय की सीधी निगरानी में जांच
मामला एक रसूखदार राजनेता से जुड़ा होने के कारण पुलिस प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी जांच प्रक्रिया की प्रत्यक्ष निगरानी आईजी कार्यालय से की जा रही है।
- साक्ष्यों का संकलन: पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेजी प्रमाण और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में जुट गई है।
- विधिक प्रक्रिया: अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सभी कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है ताकि किसी भी स्तर पर चूक न हो।
निष्पक्ष जांच का भरोसा: ‘कानून की नजर में सब बराबर‘
पूर्व विधायक के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। इस बीच प्रशासन और पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष होगी। अधिकारियों ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि जांच प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाएगा। कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं और साक्ष्यों के आधार पर ही नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


















