कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के चनतोड़ी गाँव के एक युवा किसान ने खेती में नवाचार (Innovation) के जरिए मुनाफे की नई इबारत लिख दी है। युवा किसान रोबिन इन दिनों काले प्याज (ब्लैक जेड) की खेती कर रहे हैं, जो न केवल देखने में अलग है, बल्कि गुणों और मुनाफे के मामले में भी सामान्य लाल प्याज को पीछे छोड़ रहा है।
अपनी लंबी भंडारण क्षमता और बाजार में मिलने वाले ऊंचे दामों के कारण यह काला प्याज अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है।
क्यों खास है ‘ब्लैक जेड‘ किस्म?
किसान रोबिन के अनुसार, काले प्याज की सबसे बड़ी खूबी इसकी भंडारण क्षमता (Storage Capacity) है। इसमें ‘ड्राई मैटर’ की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण यह सामान्य प्याज की तुलना में कम गलता और कम सड़ता है।
- बेहतर भंडारण: अप्रैल-मई में खुदाई के बाद इस प्याज को अक्टूबर तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसान तब अपनी फसल बेच सकते हैं जब बाजार में कीमतें सबसे अधिक होती हैं।
- स्वाद और गुणवत्ता: यह किस्म सामान्य प्याज के मुकाबले अधिक ठोस और टिकाऊ होती है।
30 एकड़ में फैली है खेती
रोबिन वर्तमान में लगभग 30 एकड़ भूमि पर काले प्याज की खेती कर रहे हैं, जिसमें से 4.5 एकड़ हिस्सा विशेष रूप से नर्सरी के लिए समर्पित है।
- रोपाई का समय: इसकी रोपाई के लिए 25 दिसंबर से 20 फरवरी तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। रोबिन बताते हैं कि यदि रोपाई में देरी हो, तो प्याज का आकार छोटा रह जाता है।
- उत्पादन: काले प्याज का उत्पादन 130 से 180 क्विंटल प्रति एकड़ के बीच होता है। हालांकि यह हाइब्रिड प्याज (200-250 क्विंटल) से थोड़ा कम है, लेकिन इसके दाम इस कमी को पूरा कर देते हैं।
मुनाफे का गणित: ₹800 तक अधिक दाम
कम उत्पादन के बावजूद काला प्याज किसानों की झोली भर रहा है। बाजार में इसे सामान्य प्याज के मुकाबले 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त दाम पर खरीदा जा रहा है।
- बीज का कारोबार: इस प्याज का बीज तैयार करने में करीब आठ महीने का समय लगता है और बाजार में इसकी कीमत 2500 से 3500 रुपये प्रति किलो तक रहती है।
- नर्सरी की मांग: रोबिन अन्य किसानों को 15,000 से 18,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से नर्सरी उपलब्ध करा रहे हैं।
कई राज्यों तक पहुँच रहा है ‘चनतोड़ी‘ का प्याज
कुरुक्षेत्र के इस छोटे से गाँव में पैदा होने वाला काला प्याज अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है। रोबिन द्वारा उत्पादित प्याज और उसकी नर्सरी की मांग हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक खेती से हटकर किए गए इस प्रयास ने साबित कर दिया है कि सही तकनीक और किस्म का चुनाव किसानों को मालामाल कर सकता है।




















