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BAFTA जीतने वाली ‘Boong’ की पीएम मोदी ने की तारीफ, जानें क्या है इस इमोशनल फिल्म की खासियत

मणिपुर की एक इमोशनल फिल्म बूंग बाफ्टा अवॉर्ड्स 2026 जीतने के बाद सुर्खियों में हैं। बूंग बाफ्टा जीतने वाली पहली फिल्म है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई के संदेश ने इस मूवी की ओर लोगों का ध्यान और भी खींचा है। बूंग का मतलब है छोटा सा लड़का। कहानी का हीरो भी वही है। बूंग का बाफ्टा जीतना क्यों खास है? पहले तो बाफ्टा अवॉर्ड इम्पॉर्टेंट क्यों है ये समझते हैं। BAFTA यानी ब्रिटिश अकैडमी ऑफ फिल्म ऐंड टेलीविजन आर्ट्स। इसे ब्रिटिश ऑस्कर भी कहा जाता है। यह अवॉर्ड मिलना मतलब है ग्लोबल पहचान मिलना। ऐसे में बॉलीवुड की कई फिल्मों को पछाड़कर मणिपुर की एक छोटी सी फिल्म का यह अवॉर्ड जीतना बड़ी बात तो है। अब बात करते हैं फिल्म की- इसकी कहानी क्या है, मूवी इतनी चर्चा में क्यों है, आपको क्यों देखनी चाहिए…यहां पढ़ें सब कुछ।

क्या है बूंग फिल्म की कहानी

बूंग एक बच्चे की इमोशनल कहानी है। मूवी का सेंट्रल कैरेक्टर बूंग नाम का एक छोटा लड़का है। वह अपनी मां के साथ मणिपुर के एक छोटे से गांव में रहता है। उसका पिता लंबे समय से गायब हैं। वह ना कुछ कहकर गए, ना ही उनकी कोई खबर है। बच्चे की दुनिया में पिता का गायब होना सिर्फ एक पारिवारिक घटना नहीं, बल्कि एक अधूरापन है। बूंग अपनी मां की उदासी को समझता है, भले ही वह उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। उसकी मासूम सोच ही पूरी कहानी में जान डालती है। यहीं से फिल्म एक साधारण घरेलू ड्रामा से आगे बढ़कर एक भावनात्मक एडवेंचर में बदल जाती है।

शुरू होती है ऐडवेंचर की जर्नी

बूंग अपने दोस्त को लेकर निकल पड़ता है अपने पिता की तलाश में। इस सफर में उसे मानसिक, भावनात्मक और भौगोलिक कई तरह के चैलेंज मिलते हैं। वह मणिपुर के गांवों से लेकर सीमा के कस्बों तक जाता है, यहां तक कि म्यांमार की सीमा पार करने की कोशिश भी करता है। कई सीन्स में बच्चे की मासूमियत दिल जीतती और चेहरे पर मुस्कुराहट लाती है तो कई जगह बूंग के हिस्से की मायूसी भी महसूस होती है।

बूम बन गई कल्चरल जेम

फिल्म में बूंग का किरदार गुगुन किपगेन ने निभाया है। कहानी मणिपुर की हरी-भरी घाटियों में सेट है। फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं बल्कि परिवार, संघर्ष और उम्मीद की गहरी बातें कहती है। मणिपुर की संस्कृति को इतने खूबसूरती से दिखाया गया है कि मूवी एक कल्चरल जेम बनकर उभरी है।

क्यों है यह जीत गेम-चेंजर?

बॉलीवुड के ग्लैमर के बीच रीजनल सिनेमा का जीतना यह साबित करता है कि अच्छी कहानी कहीं भी हो सकती है। फरहान अख्तर जैसे प्रोड्यूसर का सपोर्ट और बाफ्टा जैसा ग्लोबल प्लेटफॉर्म मिलना मणिपुरी फिल्मों के लिए नया दौर शुरू करता है। इस जीत के बाद कई भाषाओं के जानने वाले दर्शक यूट्यूब पर इसका ट्रेलर और फिल्म खोज रहे हैं। मूवी अभी किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नहीं है हालांकि उम्मीद की जा रही है कि एक्सेल एंटरटेनमेंट (फरहान अख्तर की कंपनी) जल्द ही इसके डिजिटल राइट्स किसी बड़े प्लेटफॉर्म को बेचेगी।

फिल्म से मिलता है दिल छूने वाला मैसेज

बूंग की सबसे बड़ी ताकत उसकी कहानी नहीं, बल्कि उसका विजन है। यह फिल्म मणिपुर को राजनीतिक संकट, हिंसा या समाचार की भाषा में नहीं दिखाती। इसके बजाय, यह राज्य को एक बच्चे की नजर से दिखाती है, जहां दोस्ती है, मासूमियत है, और उम्मीद हैं। बूंग सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं बल्कि समाज की तस्वीर है। बूंग भले ही एक बच्चे की अपने पिता के लिए तलाश की कहानी लग रही हो लेकिन यह टूटते परिवारों, एक पेरेंट के बिना अधूरेपन और उम्मीद की कहानी है।

क्या है बूंग की खासियत

बूंग बड़े स्टार्स की चमक-दमक, हाईफाई बजट या ग्लैमर की कहानी नहीं पर इसका ऑथेंटिक होना ही यूएसपी है। फिल्म के कैरेक्टर असली और अपने बीच के लगते हैं। फिल्म में कोई चौंकाने वाले ट्विस्ट नहीं हैं, यह सिंपल होकर भी दिल छूने वाली कहानी है। एक बच्चा दुनिया को कैसे देखता है, यह देखना भी एक अलग एक्सपीरियंस है।

फिल्म की कास्ट

डायरेक्टर- लक्ष्मीप्रिया देवी

लेखक- लक्ष्मीप्रिया देवी

स्टार्स- गुगुन किपेंग, बाला हिजाम गिंगथोजम

आईएमडीबी रेटिंग- 7.3

रन टाइम- 1 घंटा 34 मिनट

अवॉर्ड्स- 2026 बाफ्टा फिल्म अवॉर्ड (बेस्ट चिल्ड्रन्स ऐंड फैमिली फिल्म), एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड

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