जबलपुर। मध्य प्रदेश किसी मामले में गजब हो या ना हो, लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में जरूर गजब है. आए दिन सामने आ रहे रोचक मामलों में गुरुवार को एक और कड़ी जुड़ गई जब जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार से 2.6 किलोमीटर सड़क चोरी के मामले में जवाब तलब कर लिया. दरअसल यहां एक गांव की सड़क कागजों पर तो बन गई, लेकिन हकीकत में उसका कोई अता-पता नहीं है. ग्रामीणों ने तमाम जगह ‘सड़क चोरी’ की शिकायत की, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई. इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, चीफ जस्टिस की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई की और सरकार से जवाब मांग लिया. इससे अब हड़कंप मचा है. मामला कटंगी तहसील के छपरी गांव का है. छपरी से सिमरिया के बीच 2.6 किमी लंबी सड़क 2018 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत हुई थी. सड़क निर्माण के लिए फंड जारी किया गया, लेकिन सड़क कभी बनी ही नहीं. इसके बावजूद, अधिकारियों ने कागजों में इसे पूरा दिखा दिया और गांव के बाहर निर्माण का बोर्ड भी लगा दिया. हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी.
याचिका में लगाए ये आरोप
मामले को लेकर गांव के निवासी रामकिशन पटेल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में जनहित याचिका दायर की. याचिका में आरोप लगाया कि योजना के तहत आवंटित धन का दुरुपयोग हुआ है और सड़क न बनने से ग्रामीणों को भारी असुविधा हो रही है. वे बारिश में कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं, जबकि कागजों पर सड़क ‘पूर्ण’ दर्ज है. पटेल ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने दस्तावेज पेश किए, जिसमें सड़क निर्माण के लिए जारी टेंडर, फंड रिलीज और पूरा होने की रिपोर्ट शामिल थी, लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं दिखा, वहीं, गांव वालों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है. ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसी योजनाओं में भ्रष्टाचार होता है, जहां कागजी कार्रवाई से काम पूरा दिखा दिया जाता है.
याचिका में मांग की कि इस घोटाले की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई की. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और पीएमजीएसवाई से जुड़े अधिकारियों को नोटिस जारी किया. अदालत ने इन सभी से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अगर सड़क नहीं बनी तो कागजों में कैसे पूरी हो गई? यह सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है.


















