खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए आज रात यानी 28 फरवरी की रात खास होने वाली है। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में सौर मंडल के छह ग्रह एक साथ दिखाई देंगे। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को ‘प्लैनेटरी परेड’ या ग्रहीय संरेखण कहा जाता है। खास बात यह है कि 92 प्रतिशत चमक लिए चंद्रमा भी बृहस्पति के बेहद करीब नजर आएगा, जिससे दृश्य और भी मनमोहक बन जाएगा। अगली ऐसी घटना अक्टूबर 2028 के अंत में सूर्योदय से पहले घटित होगी, जब पांच ग्रह एक साथ दिखाई देंगे। इसके बाद फरवरी 2034 के अंत में सूर्यास्त के बाद पांच ग्रहों का संरेखण देखा जा सकेगा, हालांकि उस समय भी बुध और शुक्र को देखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कौन से एकसाथ ग्रह दिखाई देंगे
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दिन सूर्यास्त (लगभग शाम 6:20 बजे, स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर संभव) के 25 से 30 मिनट बाद पश्चिमी क्षितिज की ओर देखने पर बुध, शुक्र, शनि, अरुण (यूरेनस), वरुण (नेपच्यून) और बृहस्पति आकाश के लगभग एक ही आर्क में दिखाई देंगे। ग्रहों को देखने का सर्वश्रेष्ठ समय 6:45 बजे से 7:15 बजे के बीच रहेगा, क्योंकि इसके बाद बुध, शुक्र और फिर शनि क्षितिज के नीचे चले जाएंगे।
ध्यान रखें ये बातें
अमर पाल सिंह का कहना है कि ग्रहों की स्थिति में शुक्र और बुध क्षितिज के सबसे करीब होंगे, उनके बाद शनि और वरुण का स्थान होगा, जबकि अरुण और बृहस्पति अपेक्षाकृत अधिक ऊंचाई पर दिखाई देंगे। उन्होंने बताया कि मंगल, इस समय सूर्य की दूसरी ओर स्थित रहेगा, इसलिए वह इस परेड का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने बताया कि इसे देखने के लिए पश्चिमी क्षितिज की दिशा में साफ दिखने वाली खुली जगह का चयन करें। साथ ही ऊंची इमारतों और पेड़ों से दूर रहें, अन्यथा नीचे स्थित ग्रह (बुध, शुक्र व शनि) नहीं दिखेंगे।
क्या होती है प्लैनेटरी परेड
अमर पाल सिंह के अनुसार, जब तीन या उससे अधिक ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के लगभग एक ही हिस्से में, क्रांतिवृत्त के आसपास एक कतार या चाप में दिखाई देते हैं, तो उसे ‘प्लैनेटरी परेड’ कहा जाता है। खगोलीय दृष्टि से सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा लगभग एक ही समतल में करते हैं। हालांकि यह केवल दृष्टि-आधारित संरेखण होता है। वास्तव में ग्रह अंतरिक्ष में एक सीधी रेखा में पास-पास नहीं होते, बल्कि करोड़ों किलोमीटर दूर अपनी-अपनी कक्षाओं में स्थित रहते हैं। इसे दूरी का भ्रम भी कहा जाता है।
कई वर्षों में एक बार होती है ऐसी घटना
खगोलविद बताते हैं कि तीन ग्रह दिखाई दें तो सामान्य परेड मानी जाती है, चार या पांच ग्रहों का नग्न आंखों से एक साथ दिखना कई वर्षों में एक बार संभव होता है, जबकि छह या अधिक ग्रहों का एक साथ दिखना और भी दुर्लभ घटना है। नग्न आंखों से शुक्र, बृहस्पति, शनि और कभी-कभी बुध को देखा जा सकता है। इनमें शुक्र, बृहस्पति सबसे अधिक चमकदार होंगे। अरुण ग्रह देखने को अच्छी दूरबीन चाहिए, जबकि वरुण केवल शक्तिशाली टेलिस्कोप से ही दिखाई देगा।



















