10 सालों से रायपुर-दुर्ग में जमे 10 रसूखदार अधिकारियों की सूची जारी; भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति की जांच की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग में ‘पहुंच’ और ‘रसूख’ के दम पर केवल मैदानी जिलों (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर) में जमे रहने वाले तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के खिलाफ मोर्चा खुल गया है। जागरूक नागरिकों के एक समूह ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री को पत्र लिखकर 10 ऐसे अधिकारियों की सूची सौंपी है, जो पिछले कई वर्षों से बस्तर और सरगुजा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में जाने के बजाय केवल राजधानी और आसपास के जिलों में प्रतिनियुक्ति या मैदानी पोस्टिंग पर जमे हुए हैं।
राजनीतिक पकड़ और ‘मैदानी‘ मोह पर सवाल
शिकायतकर्ता सियाराम चौबे, बलबीर सिंह और अन्य ने आरोप लगाया है कि कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा के ये अधिकारी अपनी राजनीतिक पकड़ का इस्तेमाल कर दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने से बच रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन अधिकारियों को भी बस्तर और सरगुजा के जंगलों व पहाड़ी क्षेत्रों में कार्य करने का अनुभव कराया जाना चाहिए ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
इन अधिकारियों के नामों का उल्लेख (शिकायत के अनुसार):
शिकायत पत्र में विशेष रूप से निम्नलिखित अधिकारियों के मैदानी अनुभव और वर्तमान पदस्थापना का विवरण दिया गया है:
- अश्वनी कंवर (तहसीलदार): वर्तमान में उद्योग विभाग रायपुर में प्रतिनियुक्ति पर। आरोप है कि इन्होंने रायपुर और बिलासपुर में रहते हुए नामांतरण में फर्जीवाड़ा किया और भाठागांव में करोड़ों की बेनामी संपत्ति अर्जित की।
- डॉ. अंजली शर्मा (तहसीलदार): पिछले 10 वर्षों से केवल बलौदाबाजार, रायपुर और दुर्ग में कार्यरत। वर्तमान में नगर निगम रायपुर में उपायुक्त हैं।
- राकेश देवांगन (तहसीलदार): रायपुर में अतिरिक्त तहसीलदार। 10 वर्षों से केवल मैदानी जिलों में पदस्थ।
- सृजन सोनकर (तहसीलदार): 8 वर्षों से रायपुर-दुर्ग में सक्रिय। वर्तमान में खोरपा (रायपुर) में पदस्थ।
- प्रियंका धीवर, रीमा मरकाम और नोविता सिन्हा: ये तीनों तहसीलदार पिछले 7-8 वर्षों से केवल मैदानी क्षेत्रों में हैं और वर्तमान में एनआरडीए (NRDA) में प्रतिनियुक्ति पर हैं।
- अन्य नाम: प्रकाश सोनी (तहसीलदार), मनमीत कौर (नायब तहसीलदार) और प्रवीन परमार (नायब तहसीलदार) के नाम भी सूची में शामिल हैं।
गंभीर भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के आरोप
शिकायत में तहसीलदार अश्वनी कंवर पर विशेष रूप से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र के अनुसार, रायपुर में पदस्थापना के दौरान रिंग रोड की अधिग्रहित जमीन को फर्जी तरीके से रिकॉर्ड में दर्ज करने और पद का दुरुपयोग कर रिश्तेदारों के नाम पर आलीशान मकान व बेनामी संपत्ति बनाने की बात कही गई है। यह भी आरोप है कि उनकी निजी गाड़ी विभाग में किराये पर चल रही है।
जांच और तबादले की मांग
आवेदकों ने शासन से मांग की है कि:
- इन अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड की जांच की जाए।
- 5 से 15 वर्षों तक एक ही क्षेत्र में जमे अधिकारियों को बस्तर और सरगुजा संभाग भेजा जाए।
- कथित भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच हो।
यह शिकायत अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर रसूखदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली को चुनौती दी गई है।



















