रायपुर। आईडीबीआई की चरौदा शाखा में एफडी और म्युचुअल फंड फ्रॉड मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। फर्जी बांड पेपर तैयार करने वाले प्रिंटिंग प्रेस के संचालक तोपसिंह वर्मा और उसके एक पूर्व कर्मचारी की गिरफ्तारी के बावजूद संबंधित प्रिंटिंग प्रेस का संचालन जारी रहने से पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने धरसीवां स्थित उक्त प्रिंटिंग प्रेस से बैंक के एफडी बांड, म्युचुअल फंड दस्तावेज और काउंटर रसीदें बरामद की थीं। इसके बाद भी प्रेस को सील नहीं किया गया, जबकि नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक संबंधित संस्थान को सील करना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
पीड़ितों में आक्रोश, कार्रवाई पर उठे सवाल
फ्रॉड के पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी के जेल में होने के बावजूद प्रिंटिंग प्रेस का चालू रहना कई संदेह पैदा करता है। उनका कहना है कि वहां और भी फर्जी कार्य हो सकते हैं। पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए इसे अधूरी कार्रवाई बताया है।
आज होगा प्रदर्शन
मामले को लेकर पीड़ितों ने आज 30 मार्च को राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित बैंक के रीजनल ऑफिस के सामने प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई नेता भी शामिल होंगे, जिनमें राजेंद्र पप्पू बंजारे, श्रीकुमार शंकर मेनन, छाया वर्मा, अनीता शर्मा और पंकज शर्मा प्रमुख हैं।
पीड़ितों की मांग है कि उनकी फंसी हुई राशि ब्याज सहित वापस की जाए और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्हें भुगतान का लिखित आश्वासन चाहिए।
1.53 करोड़ से अधिक की रकम फंसी
बताया जा रहा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में 21 पीड़ितों की करीब 1 करोड़ 53 लाख रुपए से अधिक की राशि फंसी हुई है। आरोपियों द्वारा दिए गए फर्जी बांड पेपर पर बैंक की सील भी लगी हुई है। हालांकि यह सील कहां और कैसे लगाई गई, इस पर अब तक स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है।
बैंक ने एसपी को लिखा पत्र
मामले में बैंक के रीजनल ऑफिस ने एसपी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि पीड़ितों द्वारा की जा रही तालाबंदी से बैंक के कामकाज और विभागीय जांच प्रभावित हो रही है। वहीं, पीड़ितों का कहना है कि पहले उनकी राशि लौटाई जाए, उसके बाद बैंक आरोपियों से वसूली करता रहे।



















