नई दिल्ली। देशभर के जीएसटी (GST) करदाता इन दिनों नियम 86B को लेकर भारी तनाव में हैं। कोरोना महामारी के बाद लागू किए गए इस नियम के कारण बड़ी संख्या में व्यापारियों के जीएसटी पंजीकरण सस्पेंड या कैंसिल किए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें वे व्यापारी भी शामिल हैं जिन्होंने न तो टैक्स चोरी की है और न ही कोई फ्रॉड, फिर भी उनका व्यापारिक नंबर बंद किया जा रहा है।
क्या है नियम 86B और क्यों लाया गया?
नियम 86B को जनवरी 2021 से प्रभावी किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अवैध खरीद-बिक्री पर नकेल कसना था।
• नियम का प्रावधान: यदि किसी कारोबारी की एक महीने की कर योग्य बिक्री (निर्यात को छोड़कर) 50 लाख रुपये से अधिक है, तो वह अपने कुल टैक्स दायित्व का 100% भुगतान ITC से नहीं कर सकता।
• अनिवार्य नकद भुगतान: पर्याप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट होने के बावजूद, उसे कुल टैक्स का कम से कम 1 प्रतिशत नकद (Cash) जमा करना अनिवार्य है। ऐसा न करने की स्थिति में जीएसटी नंबर सस्पेंड या कैंसिल करने का प्रावधान है।
कहाँ आ रही है दिक्कत?
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि विभाग बिना किसी पूर्व नोटिस के सीधा पंजीकरण सस्पेंड कर रहा है। कई मामलों में देखा गया है कि दो-तीन साल पुराने मामूली अंतर (जैसे 20 हजार रुपये की कैश पेमेंट की जगह ITC इस्तेमाल करना) के कारण आज व्यापार ठप किया जा रहा है। सस्पेंशन के कारण कारोबार की प्रतिष्ठा पर गहरा आघात लगता है और दो-चार दिन तक काम पूरी तरह बंद हो जाता है।
डेटा के अभाव में झेलनी पड़ रही मार
नियम 86B से उन लोगों को छूट प्राप्त है जिन्होंने पिछले दो वर्षों में 1 लाख रुपये से अधिक का इनकम टैक्स भरा है। लेकिन समस्या यह है कि इनकम टैक्स का डेटा अक्सर जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होता। इस वजह से नियमतः छूट के हकदार व्यापारियों का नंबर भी सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से सस्पेंड कर दिया जाता है।
दोहरी मार: एक ही टैक्स का दो बार भुगतान
विशेषज्ञों के अनुसार, जब 86B के डिफॉल्ट की पेमेंट DRC-03 के माध्यम से नकद कराई जाती है, तो वह टैक्स व्यापारी पहले ही ITC के माध्यम से दे चुका होता है। ऐसे में व्यापारी से एक ही टैक्स दो बार ले लिया जाता है। मांग की जा रही है कि नकद भुगतान के बाद विभाग को उतना ही पैसा व्यापारी के क्रेडिट लेजर में ऑटोमैटिक तरीके से वापस कर देना चाहिए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “पंजीकरण रद्द करना असंवैधानिक”
नियम 86B के उल्लंघन पर पंजीकरण रद्द करने का एक मामला हिमाचल हाईकोर्ट भी पहुँचा था। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल इस तकनीकी चूक के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैंसिल करना असंगत है और यह संवैधानिक मंशा के मेल नहीं खाता।



















