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लोकसभा में अमित शाह का बड़ा दावा: “देश नक्सलमुक्त”, 21 में से सिर्फ एक शीर्ष नक्सली बाकी

नई दिल्ली। नक्सलवाद के मुद्दे पर लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि देश से “लाल आतंक की परछाई हट गई है” और भारत नक्सलमुक्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि शीर्ष स्तर के नक्सली नेटवर्क को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

21 में से 20 शीर्ष नक्सली खत्म या सरेंडर

गृह मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि 2024 तक नक्सलियों की टॉप सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो में 21 मुख्य कैडर सक्रिय थे, जो पूरे नेटवर्क को संचालित करते थे।

इनमें से:

* 12 टॉप नक्सली मारे गए

* 7 ने आत्मसमर्पण कर दिया

* 1 को गिरफ्तार किया गया

* अब केवल 1 प्रमुख नक्सली फरार है

उन्होंने बताया कि इस अंतिम नक्सली से भी बातचीत जारी है और उसके जल्द सरेंडर की उम्मीद है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह नक्सली झारखंड के सारंडा जंगलों में छिपा हुआ है।

हथियार डालो या जवाब मिलेगा शाह

अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है—जो नक्सली हथियार डालेंगे, उन्हें पुनर्वास मिलेगा, लेकिन हिंसा जारी रखने वालों को “गोली का जवाब गोली से” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

नक्सलवाद का इतिहास भी रखा सामने

गृह मंत्री ने बताया कि 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ माओवादी आंदोलन धीरे-धीरे 12 राज्यों तक फैल गया और “रेड कॉरिडोर” बन गया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने विकास के नाम पर नहीं, बल्कि समानांतर सत्ता स्थापित करने के लिए इन क्षेत्रों को चुना।

कांग्रेस पर आरोप, इंदिरा गांधी का भी जिक्र

अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि 1970-77 के दौरान माओवादी विचारधारा को समर्थन मिला, जिससे यह आंदोलन तेजी से फैला। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों का विकास नहीं कर सकी।

सुरक्षा बलों को दिया श्रेय

गृह मंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, राज्य पुलिस बलों, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ पुलिस और डीआरजी जवानों को दिया। उन्होंने कहा कि इन बलों के साहस और बलिदान से ही नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार संभव हो पाया।

आंकड़ों में कार्रवाई (2024 के बाद)

* 706 नक्सली मुठभेड़ में ढेर

* 2218 गिरफ्तार

* 4849 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

अमित शाह ने निष्कर्ष में कहा कि नक्सलवाद ने विकास को रोका और गरीबी को बढ़ाया। अब इसके समाप्त होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास का रास्ता खुलेगा।

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