रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में संचालित एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कोर्स शुरू हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक विभाग में पर्याप्त प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। वर्तमान में करीब 23 छात्र इस पाठ्यक्रम में अध्ययनरत हैं, जिन्हें केवल एक ही प्रोफेसर के भरोसे पढ़ाई करनी पड़ रही है।
जानकारी के मुताबिक, विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या सीमित होने के चलते फिलहाल एक ही प्रोफेसर पदस्थ है। यही प्रोफेसर पाठ्यक्रम के सभी विषयों की कक्षाएं ले रहा है। ऐसे में छात्रों को विषय विशेषज्ञों से पढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा, जिससे उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
छात्रों का कहना है कि एक ही शिक्षक द्वारा सभी विषय पढ़ाए जाने से विषयों को गहराई से समझना मुश्किल हो जाता है। कई बार कक्षाओं की निरंतरता और परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित होती है। छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द से जल्द विषयवार विशेषज्ञ प्रोफेसरों की नियुक्ति की मांग की है।
एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की भाषा, साहित्य और संस्कृति का व्यापक अध्ययन कराया जाता है। इसमें छत्तीसगढ़ी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, ध्वनि संरचना, साहित्य का इतिहास, पत्रकारिता, लोक परंपरा, लोक साहित्य, काव्य, आलोचना, उपन्यास, कहानी और नाटक जैसे विषय शामिल हैं। यह कोर्स विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ता है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सुनील शर्मा ने बताया कि एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम के लिए फिलहाल एक ही पद स्वीकृत है और उसी के तहत एक प्रोफेसर की नियुक्ति की गई है, जो सभी विषयों का अध्यापन करवा रहे हैं।



















