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5 साल से गायब डॉक्टरों पर फूटा मुख्यमंत्री का गुस्सा: 128 पर गिरी गाज, एक परमानेंट बर्खास्त

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और डॉक्टरों की लापरवाही पर लगाम लगाने के लिए एक राज्य के मुख्यमंत्री ने बेहद सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सालों से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब चल रहे 128 चिकित्सा अधिकारियों और दंत चिकित्सकों (Dental Surgeons) के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, लंबे समय से लापता एक महिला डॉक्टर को सरकारी सेवा से हमेशा के लिए बर्खास्त (Sack) कर दिया गया है।

अखबारों में विज्ञापन देकर भी नहीं सुधरे, अब होगी विभागीय जांच

मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी डॉक्टर पिछले 5 या उससे अधिक सालों से बिना किसी आधिकारिक अनुमति के अपनी ड्यूटी से नदारद थे। इससे पहले राज्य सरकार ने अखबारों में सार्वजनिक नोटिस और विज्ञापन जारी कर इन डॉक्टरों से उनके गायब होने की वजह पूछी थी और काम पर लौटने का निर्देश दिया था।

बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी इन डॉक्टरों ने न तो कोई जवाब दिया और न ही ड्यूटी जॉइन की। डॉक्टरों के इस अड़ियल रवैये को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को इन सभी 128 डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई (Departmental Proceedings) शुरू करने का निर्देश दिया है।

2012 से गायब महिला डॉक्टर सेवा से बर्खास्त

इस पूरे मामले में कंधमाल पुलिस अस्पताल की पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिचक्षणा पाणिग्रही पर सबसे बड़ी गाज गिरी है। उन्हें सरकारी सेवा से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया गया है। डॉ. पाणिग्रही साल 2012 से ही अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब थीं। बीते सालों में उन्हें कई बार ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया, लेकिन उन्होंने न तो कोई वैध कारण बताया और न ही अस्पताल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मरीजों के इलाज में इस कदर लापरवाही बरतने के कारण आखिरकार उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।

“मरीजों के हक पर डाका बर्दाश्त नहीं” — मुख्यमंत्री ओड़िशा

इस कड़ी कार्रवाई पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ओड़िशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए नए अस्पताल बनाने, मौजूदा सुविधाओं को आधुनिक बनाने और नए मेडिकल कॉलेज खोलने में भारी निवेश कर रही है। लेकिन हम ऐसी स्थिति को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे जहां डॉक्टर सरकारी नियुक्ति पाने के बाद गायब हो जाएं और मरीजों को बुनियादी इलाज से भी वंचित कर दें। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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