रायपुर। प्रदेश के सरकारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा एक बार फिर व्यवस्थागत लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। स्कूल खुले करीब डेढ़ माह बीत चुके हैं, लेकिन कई विद्यालयों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर करीब 1.86 लाख विद्यार्थियों की कौशल आधारित पढ़ाई पर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति में कौशल शिक्षा को प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद प्रशिक्षकों की नियुक्ति समय पर नहीं हो पाने से पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
प्रदेश के लगभग 1,284 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में 15 अलग-अलग ट्रेड के व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में दो ट्रेड चलाए जाते हैं, लेकिन प्रशिक्षकों की नियुक्ति, टेंडर प्रक्रिया और मानदेय को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं।
पिछले साल भी नहीं मिली थी राहत
बीते शिक्षा सत्र में भी व्यावसायिक प्रशिक्षकों की भर्ती विवादों में घिर गई थी। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत पुलिस तक पहुंची, जिसके कारण 500 से अधिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति अटक गई। परिणामस्वरूप 300 से अधिक स्कूलों में पूरे वर्ष विद्यार्थियों को बिना प्रशिक्षक के ही व्यावसायिक पाठ्यक्रम पढ़ना पड़ा। उन्हें केवल सैद्धांतिक जानकारी मिली, जबकि व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिल सका।
स्थिति इस वर्ष भी लगभग वैसी ही बनी हुई है। 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद अनेक स्कूलों में प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
टेंडर से पहले वायरल हुए भर्ती विज्ञापन
समग्र शिक्षा ने इस वर्ष प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए नया टेंडर जारी किया है और फिलहाल प्रक्रिया जारी है। इसी बीच कुछ निजी एजेंसियों के भर्ती विज्ञापन सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे हैं। इनमें रिटेल, एपेरेल, हेल्थ केयर, बैंकिंग एवं फाइनेंशियल सर्विसेज तथा कंस्ट्रक्शन ट्रेड के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं। विज्ञापनों में 23,500 रुपये मासिक मानदेय का उल्लेख किया गया है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ऐसे विज्ञापन सामने आने से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले वर्ष भी अनुमति से पहले भर्ती विज्ञापन प्रसारित होने और लेन-देन के आरोपों के चलते विवाद खड़ा हुआ था।
मानदेय घटाने के विरोध में कोर्ट पहुंचे प्रशिक्षक
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने इस बार प्रस्तावित मानदेय में कटौती और नियुक्ति की शर्तों का विरोध किया है। प्रशिक्षकों का कहना है कि उनका मानदेय 23 हजार रुपये से घटाकर 20 हजार रुपये करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही पहले से कार्यरत प्रशिक्षकों को यथावत रखने के संबंध में भी कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। इसी मुद्दे को लेकर प्रशिक्षकों ने न्यायालय में याचिका दायर की है।
किताबें भी नहीं पहुंचीं
सूत्रों के अनुसार कई विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पुस्तकें भी अब तक नहीं पहुंची हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को न तो प्रशिक्षक मिल रहे हैं और न ही अध्ययन सामग्री, जिससे कौशल आधारित शिक्षा का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
इन ट्रेडों में संचालित हो रहे हैं पाठ्यक्रम
प्रदेश के स्कूलों में एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, ब्यूटी एंड वेलनेस, बैंकिंग एवं फाइनेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, हेल्थ केयर, सूचना प्रौद्योगिकी, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, रिटेल, टेलीकॉम, पावर, एपेरेल, प्लंबिंग, कंस्ट्रक्शन तथा टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सहित 15 ट्रेडों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है।
स्थिति यह संकेत देती है कि यदि नियुक्ति और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस वर्ष भी हजारों विद्यार्थियों की कौशल शिक्षा प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।


















