रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी आयुर्वेदिक औषधालयों, जिला आयुर्वेद अस्पतालों और प्रमुख आयुर्वेद कॉलेज अस्पतालों में दवाइयों की कमी का संकट बना हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले करीब डेढ़ साल से आयुर्वेदिक दवाइयों की नियमित खरीदी नहीं हो पाई है। इसके चलते अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं का स्टॉक खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है और मरीजों को कई जरूरी दवाइयां खुले बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार आयुर्वेद की क्लासिकल दवाइयों का रेट कॉन्ट्रैक्ट पिछले एक साल से नहीं हुआ है, जबकि पेटेंट दवाओं का रेट कॉन्ट्रैक्ट भी करीब छह माह से लंबित है। रेट कॉन्ट्रैक्ट नहीं होने का सीधा असर दवाइयों की आपूर्ति पर पड़ा है। स्थिति यह है कि सीजीएमएससी के गोदामों में आयुर्वेदिक दवाइयों का स्टॉक लगभग शून्य बताया जा रहा है।
प्रस्ताव को मिल चुकी है मंजूरी
विभागीय सूत्रों के मुताबिक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और वित्त सचिव की ओर से आयुर्वेदिक दवाओं के दर अनुबंध की अवधि छह माह बढ़ाने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि अनुमति मिलने के बाद भी 23 दिन बीत जाने के बावजूद रेट कॉन्ट्रैक्ट नहीं बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। इससे दवाओं की आपूर्ति को लेकर स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
नई निविदा को लेकर भी उठ रहे सवाल
विभागीय सूत्रों का कहना है कि आयुर्वेदिक दवाओं की नई निविदा फिलहाल लंबित है। इस प्रक्रिया में कुछ ऐसी कंपनियों को शामिल करने की कोशिश किए जाने की चर्चा है, जिनकी पात्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में लागू पुराना रेट कॉन्ट्रैक्ट वर्ष 2023 का है। पुराने रेट की तुलना में प्रस्तावित नई निविदा में दवाओं की दरों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। ऐसे में नई निविदा से सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने के साथ ही दवाओं की आपूर्ति शुरू होने में भी समय लग सकता है।
गरीब मरीजों पर पड़ रहा सीधा असर
सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की होती है। सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। इससे नि:शुल्क या कम खर्च में इलाज की सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
2022-23 में हुआ था रेट कॉन्ट्रैक्ट
विभागीय जानकारी के अनुसार सीजीएमएससी ने वर्ष 2022-23 में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट की निविदा की थी। इसकी अवधि 18 माह निर्धारित थी। प्रबंध संचालक को निविदा की अवधि छह माह बढ़ाने का अधिकार होने के कारण रेट कॉन्ट्रैक्ट को छह माह के लिए बढ़ाया गया था। इसके बाद वैध रेट कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति बनी।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय के 21 नवंबर 2024 के आदेश में अपरिहार्य परिस्थितियों में वित्त विभाग की सहमति से अधिकतम एक वर्ष के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाए जाने का प्रावधान किया गया है। इसी आधार पर सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल ने 3 मार्च 2026 को सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को आयुर्वेदिक दवाओं के दर अनुबंध को एक वर्ष के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था।
अब सवाल यह है कि जब दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की अनुमति भी मिल चुकी है, तो इसके बावजूद अस्पतालों में दवाओं की नियमित आपूर्ति कब तक बहाल होगी। विभागीय स्तर पर निर्णय में देरी का खामियाजा फिलहाल मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।


















