पश्चिमी प्रशांत महासागर में इस समय एक साथ चार तूफान सक्रिय हैं। इन तूफानों के नाम सौडेल, नारा, गैनारी और आतसानी बताए गए हैं। अगस्त महीने में एक साथ चार उष्णकटिबंधीय सिस्टम के सक्रिय होने की यह स्थिति लंबे समय बाद बनी है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले आठ वर्षों में अगस्त के दौरान ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली थी। चारों तूफानों की स्थिति, तीव्रता और आगे बढ़ने की दिशा एक-दूसरे से अलग है। ऐसे में प्रत्येक सिस्टम का मौसम पर प्रभाव भी अलग-अलग हो सकता है। चारों सक्रिय तूफानों में सौडेल इस समय सबसे शक्तिशाली बताया जा रहा है। वहीं बाकी तीन सिस्टम नारा, गैनारी और आतसानी की ताकत और स्थिति अलग है।
24 अगस्त के तूफानी नक्शे में इन चारों सिस्टम के केंद्र टोंकिन की खाड़ी से लेकर फिलीपींस के पूर्व और जापान के दक्षिण में समुद्री क्षेत्र तक फैले हुए थे। इनके बीच हजारों किलोमीटर की दूरी थी। मौसम विशेषज्ञ इन सभी सिस्टम की स्थिति, हवा की रफ्तार और आगे के संभावित बदलावों पर नजर रख रहे हैं।
एक साथ चार तूफान कैसे बने?
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, 24 अगस्त को उत्तर-पश्चिमी प्रशांत में नारा, सौडेल, गैनारी और आतसानी नाम के चार सिस्टम एक साथ मौजूद थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चारों तूफान एक ही दिन बने थे। अलग-अलग समय और अलग-अलग जगहों पर बने इन सिस्टम का जीवनचक्र एक-दूसरे से कुछ समय के लिए ओवरलैप हुआ।
उस समय:
- गैनारी चीन के फुजियान के पास पहुंच रहा था।
- नारा टोंकिन की खाड़ी में बना हुआ था।
- सौडेल जापान के दक्षिण में समुद्री क्षेत्र में मजबूत हो रहा था।
- आतसानी फिलीपींस के काफी पूर्व में अभी-अभी बना था।
- सौडेल सबसे मजबूत, 165 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है रफ्तार
सौडेल चारों में सबसे मजबूत है। 25 अगस्त की सुबह JMA ने इसे ‘बहुत शक्तिशाली टाइफून’ की श्रेणी में रखा। इसकी हवा की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा थी। फिलीपींस की PAGASA के मुताबिक, इसकी लगातार हवा की रफ्तार करीब 150 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की रफ्तार 185 किलोमीटर प्रति घंटे तक थी। इसके बाद सौडेल पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में रयूक्यू द्वीपों की ओर बढ़ रहा था और आगे दक्षिण-पूर्वी चीन के तट के पास पहुंचने की संभावना थी। फिलहाल सौडेल अपने उत्पत्ति क्षेत्र से करीब 35 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी ताकत लगातार बढ़ रही है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इसकी स्थिति और दिशा में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।
गैनारी की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर
गैनारी फिलहाल चारों में अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में है। इसकी हवा की रफ्तार करीब 65 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की रफ्तार लगभग 95 किलोमीटर प्रति घंटे है। गैनारी अभी लगभग उसी क्षेत्र में बना हुआ है। गैनारी 24 अगस्त की दोपहर चीन के फुजियान प्रांत के क्वांझोउ के पास पहुंचा था। इसकी ताकत करीब लेवल 8 थी और तट से टकराने के बाद इसके तेजी से कमजोर होने का अनुमान है।
अलग दिशा में बढ़ रहा आतसानी
आतसानी का रास्ता बाकी सिस्टम से अलग है। यह करीब 15.1 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 137.3 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास स्थित है। इसकी हवा की रफ्तार करीब 65 किलोमीटर प्रति घंटे है, जबकि झोंकों की गति करीब 95 किलोमीटर प्रति घंटे तक है। आतसानी करीब 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ रहा है। यह लूजोन द्वीप के सबसे उत्तरी हिस्से से करीब 1,760 किलोमीटर पूर्व में है।
नारा और गैनारी लगभग एक ही इलाके में
चारों सक्रिय सिस्टम में नारा और गैनारी फिलहाल लगभग एक ही इलाके में हैं। हालांकि, आने वाले समय में उनकी ताकत और दिशा में बदलाव हो सकता है। नारा हवा की रफ्तार के मामले में सौडेल से काफी कमजोर है, लेकिन वियतनाम के लिए इसका खतरा ज्यादा सीधा है। 25 अगस्त की सुबह वियतनाम के नेशनल सेंटर फॉर हाइड्रो-मेटियोरोलॉजिकल फोरकास्टिंग के मुताबिक, यह टाइफून नंबर 4 के रूप में लेवल 8 यानी 62-74 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की रफ्तार के साथ टोंकिन की खाड़ी में बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। इसके कारण लंबे समय तक बारिश होने से बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ सकता है।
कहां-कहां बरपा सकते हैं कहर?
चारों तूफानों का संभावित असर अलग-अलग क्षेत्रों में है। नारा का सीधा खतरा वियतनाम के लिए बताया गया है, जहां इससे लंबे समय तक बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ सकता है। गैनारी चीन के फुजियान प्रांत के पास पहुंच चुका था और वहां इसका असर पड़ा। सौडेल जापान के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से रयूक्यू द्वीपों की ओर बढ़ रहा और आगे दक्षिण-पूर्वी चीन के तट के पास पहुंचने की संभावना है। वहीं आतसानी फिलीपींस के काफी पूर्व में है और उस समय कमजोर पड़ रहा है। इस तरह फिलहाल वियतनाम, चीन, जापान और फिलीपींस से जुड़े समुद्री क्षेत्रों पर इन चारों सिस्टम की गतिविधियों का असर देखा जा सकता है।
क्या ऐसा पहले भी हुआ है?
जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेटिक्स के डिजिटल टाइफून के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 1951 से 2025 के बीच कुल 27,394 दिनों में सिर्फ 34 दिन ऐसे रहे, जब चार या उससे ज्यादा सिस्टम एक ही दिन सक्रिय थे। यह करीब 0.124 फीसदी है। 75 साल की अवधि में सिर्फ 11 वर्षों में कम से कम एक दिन ऐसा आया, जब चार या उससे ज्यादा सिस्टम एक साथ सक्रिय थे। इससे पता चलता है कि यह स्थिति वाकई दुर्लभ है, हालांकि इतिहास में ऐसा पहले भी हुआ है।
सबसे असाधारण घटना अगस्त 1960 में दर्ज हुई थी। उस समय पांच उष्णकटिबंधीय चक्रवाती सिस्टम एक साथ सक्रिय थे। इसे पांच ओलंपिक रिंग्स जैसी आकृति के कारण ‘ओलंपिक टाइफून’ कहा गया था। चार सिस्टम के एक साथ सक्रिय होने की घटनाएं 1955, 1966, 1972, 1985, 1994, 2017 और हाल में नवंबर 2024 में भी दर्ज की गई थीं। नवंबर 2024 में यिनशिंग, तोराजी, मैन-यी और उसागी एक साथ उत्तर-पश्चिमी प्रशांत में मौजूद थे।
2026 में अल नीनो भी एक वजह
इस साल एक और कारक अल नीनो है। जलवायु अध्ययनों के मुताबिक, अल नीनो वाले वर्षों में उत्तर-पश्चिमी प्रशांत में तूफान बनने वाले क्षेत्र आमतौर पर पूर्व की ओर खिसकते हैं। इससे कुछ तूफानों को समुद्र के ऊपर लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। सौडेल और आतसानी का काफी पूर्व में होना इसी विशेषता के अनुरूप बताया गया है। हालांकि, अगस्त के आखिर में मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन यानी MJO की स्थिति ऐसी नहीं थी जिससे उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तूफानी गतिविधि बढ़ने का स्पष्ट संकेत मिले।


















