श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इसमें बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके सुखद भविष्य की कामना करती हैं, लेकिन इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिन है। आज पूर्णिमा तिथि सुबह समाप्त हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि में पूर्णिमा का मान पूरे दिन रहेगा। ऐसे में पूरे दिन बहन भाई को राखी बांध सकती है। आपको बता दें कि भाई भी बहन की जीवन पर्यन्त रक्षा करने का प्रण लेते हैं। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा मुक्त रहेगा। इसलिए ना तो ग्रहण का असर आज आपको परेशान करेगा। आज आप ग्रहण का दान कर सकते हैं। यहां हम आपको एक से अधिक राखी के मुहूर्त बता रहे हैं ,जिसमें आप अपने भाई के राखी बांध सकती हैं।
ये हैं शुभ मुहूर्त, भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित है
ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि हृषिकेश पंचाग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय 5:41 बजे और पूर्णिमा तिथि का मान दिन में प्रातः 9:18 बजे तक है। वहीं, शतभिषा सम्पूर्ण दिन और शेष रात्रि 04:01 बजे तक रहेगा। इसलिए प्रातःकाल 05:41 बजे के बाद और दिन में 09:18 बजे के अंतर्गत रक्षाबंधन किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसमें अपराह्न तिथि ली जाती है। यदि दो दिन है तो इसमें पूर्वा और परा दोनों ली जाती है। यदि उस दिन भद्रा है तो उसका परित्याग करना चाहिए। भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित है, क्योंकि श्रावणी से राजा का और फाल्गुनी से प्रजा का अनिष्ट होता है।
28 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त
इस बार श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर शुरू हुई और 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से पूर्णिमा के साथ ही भद्रा भी लग गई थी जो रात 9 बजकर 27 मिनट तक रही।
भारत में ग्रहण का कोई असर नहीं
28 अगस्त को खंडग्रास (आंशिक) चंद्रग्रहण होगा, लेकिन भारत के किसी भी भाग में ये ग्रहण दृश्य नहीं होगा। इसलिए भारत में इस ग्रहण का ना तो कोई प्रभाव मान्य होगा और ना ही सूतक लगेगा। इसलिए रक्षाबंधन के पर्व पर भी चंद्रग्रहण का कोई असर नहीं होगा। ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए ऐसे में ग्रहण का कोई असर नहीं माना जाता है। जिन देशों में ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहां ग्रहण का असर माना जाता है। बहनें भाइयों की कलाई पर सिर्फ धागा नहीं, प्यार, भरोसे और जिम्मेदारी का रिश्ता बांधती हैं।


















