सोने-चांदी के भाव आज धड़ाम हो गए हैं। घरेलू कमोडिटी मार्केट में आज 10 ग्राम सोने का भाव 2675 रुपये सस्ता होकर 148025 रुपये पर आ गया है। जबकि, चांदी के रेट में बड़ी गिरावट है। आज साढ़े नौ बजे के करीब एमसीएक्स सिल्वर 6121 रुपये टूटकर 228879 रुपये प्रति किलो पर आ गई। सोने-चांदी के ये रेट स्पॉट प्राइस नहीं है। ये वायदा भाव हैं। एमसीएक्स पर जो रेट चल रहे हैं, उसके आसपास ही सर्राफा बाजारों में सोने-चांदी के रेट खुलते हैं।
एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार, 29 जनवरी को सोना 1,93,096 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर था और तब से लेकर आज की डेट तक 45071 रुपये तक सस्ता हो चुका है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर का ऑल टाइम हाई 4,20,048 रुपये है और यह 191169 रुपये सस्ता हो चुका है।
इंटरनेशनल मार्केट में ₹4,265 डॉलर के आसपास पहुंचा गोल्ड
सोने की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। पिछले सप्ताह 2 फीसदी से ज्यादा गिरने के बाद स्पॉट गोल्ड करीब 0.5 फीसदी टूटकर 4,261.59 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सुबह 7:56 बजे सिंगापुर में सोना करीब 4,265 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। सितंबर में सोना करीब 4,230 से 4,510 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा है। जनवरी में करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद यह उससे काफी नीचे है।
क्यों गिरने लगे सोने के भाव
सोने पर सबसे बड़ा दबाव फिलहाल अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और महंगे कच्चे तेल से बन रहा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अपनी शर्तों में नरमी से इनकार किया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि इस सप्ताह बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद है।
सोने के साथ चांदी में भी गिरावट रही। स्पॉट सिल्वर 0.8 फीसदी गिरकर 63.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। पिछले सप्ताह चांदी करीब 3 फीसदी कमजोर हुई थी। प्लैटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट दर्ज की गई।
महंगे तेल से बढ़ी ब्याज दरों की चिंता
होर्मुज संकट के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इस साल ब्रेंट क्रूड करीब 70 फीसदी चढ़ चुका है। महंगे तेल से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर पड़ सकता है।
क्लीवलैंड फेड की चेयरमैन बेथ हैमैक ने कहा कि लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के पीछे मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद, सरकारी कर्ज को लेकर चिंता और आगे ब्याज दर बढ़ने की संभावना जैसे कारण हैं।
फेड अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में बेंचमार्क ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर सर्वसम्मति से फैसला किया था। इसके बाद कई अधिकारियों ने संकेत दिया है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए आगे भी दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। बाजार में अक्टूबर में एक और दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 65 फीसदी आंकी जा रही है।
अमेरिकी डॉलर भी सोने के लिए बना दबाव
अमेरिकी डॉलर में मजबूती ने भी सोने की तेजी को सीमित किया है। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स सोमवार को 0.1 फीसदी ऊपर था और इस महीने की शुरुआत से अब तक करीब 2 फीसदी चढ़ चुका है। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर डॉलर में कीमत वाला सोना दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग पर दबाव आ सकता है।


















