बिलासपुर। हाईकोर्ट ने गर्भपात से दुष्कर्म पीड़िता के जीवन को संकट उत्पन्न होने की संभावना को देखते हुए गर्भपात की अनुमति नहीं दी है। कोर्ट ने शासन को पीड़िता के सुरक्षित प्रसव कराने का निर्देश दिया है। सरगुजा क्षेत्र निवासी नाबालिग दुष्कर्म का शिकार हुई, इससे वह गर्भवती हो गई। गर्भ ठहरने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि, वह बलात्कार की शिकार है और उसने मेडिकल कारणों से गर्भपात की अनुमति मांगी गई। याचिकाकर्ता नाबालिग की हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी द्वारा सहायता की गई।
याचिकाकर्ता डॉ. भीमराव अंबेडकर सरकारी मेडिकल कॉलेज, रायपुर में भर्ती है। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और इस बात पर विचार करते हुए कि याचिकाकर्ता की प्रेग्नेंसी लगभग 29 हफ़्ते की है, इसलिए डॉ. भीमराव अंबेडकर सरकारी मेडिकल कॉलेज, रायपुर के अधिकारियों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की धारा 3(2) के तहत पीड़िता की जांच करवाने का निर्देश दिया। राज्य के वकील ने कहा कि, आवेदन में की गई दलीलों और मांगी गई राहत की प्रकृति को देखते हुए, उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों, पार्टियों के वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों पर विचार करते हुए, डॉ. भीमराव सरकारी मेडिकल कॉलेज, रायपुर के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को निर्देश दिया कि वे 12. दिसंबर 2025 को विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा याचिकाकर्ता की जांच की व्यवस्था करें, जिसमें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होना चाहिए और 1971 के अधिनियम की धारा 3 (2) और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने जांच की।



















