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तीसरी कक्षा से बच्चों को सिखाया जाएगा एआई, नए सत्र 2026-27 से लागू करने की तैयारी

रायपुर। स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए अब तीसरी कक्षा से ही बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग सिखाने की तैयारी की जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इसे लागू किया जा सकता है। शुरुआत में यह पहल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों, केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में लागू करने की योजना है।

जानकारी के अनुसार, फिलहाल एआई को एक अलग विषय के रूप में नहीं बल्कि एक्टिविटी आधारित लर्निंग के तौर पर शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य कम उम्र में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता को विकसित करना है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद से ही इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी गई थी।

चार से छह माह में तैयार होगा पाठ्यक्रम

एआई और सीटी से जुड़े कोर्स और बेसिक किताबें अगले चार से छह महीनों में तैयार कर ली जाएंगी। इसके साथ ही शिक्षकों के चयन और प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चों को प्रभावी तरीके से पढ़ाया जा सके।

इस दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है, जो एआई और सीटी पाठ्यक्रम विकसित करेगी।

शिक्षकों को भी मिलेगी एआई की ट्रेनिंग

शिक्षा में डिजिटल स्किल्स को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को भी एआई और साइबर सुरक्षा से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा सभी शिक्षकों को 50 घंटे का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें डिजिटल कौशल और साइबर ठगी से बचाव भी शामिल होगा।

दीक्षा पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण

शिक्षकों को यह प्रशिक्षण दीक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दिया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम बोर्ड परीक्षाओं के बाद शुरू किया जाएगा और यह सतत व्यावसायिक विकास का हिस्सा होगा।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में भी छठवीं कक्षा से एआई को पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार किया जा सके।

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