रायपुर। गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक स्थित सूपेबेड़ा गांव में किडनी बीमारी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में लगाए गए विशेष स्वास्थ्य शिविर के बाद सामने आई जांच रिपोर्ट में 15 मरीजों में किडनी रोग की पुष्टि हुई है।
जानकारी के अनुसार फरवरी के अंतिम सप्ताह में विशेषज्ञों की टीम ने सूपेबेड़ा में एक दिवसीय स्वास्थ्य शिविर लगाया था। इस दौरान बीमारी के संदिग्ध 48 मरीजों के खून और पेशाब के नमूने लेकर जांच के लिए एम्स रायपुर की प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में 15 मरीजों में किडनी रोग की पुष्टि हुई है।
एम्स के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनय राठौर ने बताया कि पुष्टि किए गए मरीजों में सात पुराने और आठ नए मरीज शामिल हैं। शिविर का आयोजन गरियाबंद के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.एस. नवरत्ने की उपस्थिति में किया गया था।
पानी में खतरनाक खनिजों की पुष्टि
इससे पहले वर्ष 2024 में आयोजित स्वास्थ्य शिविर की रिपोर्ट में सूपेबेड़ा के भूजल में आर्सेनिक, लीथियम, फ्लोराइड, क्रोमियम और मैंगनीज जैसे खतरनाक खनिजों की अधिकता पाई गई थी। विशेषज्ञों ने पीने के पानी की गुणवत्ता सुधारने की सिफारिश की थी।
इसके बावजूद अब तक गांव के पास तेल नदी के किनारे प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र स्थापित नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के कारण बीमारी का खतरा लगातार बना हुआ है।



















