वेब डेस्क | नई दिल्ली साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आगामी 3 मार्च को लगने जा रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला यह ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। भारत में दिखाई देने के कारण इस ग्रहण का धार्मिक महत्व और सूतक काल दोनों ही मान्य होंगे।
समय और सूतक काल का गणित
भारतीय समय के अनुसार, चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा।
- सूतक काल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। अतः 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही सूतक प्रभावी हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और शुभ कार्यों पर रोक रहेगी।
राशिफल: किसका चमकेगा भाग्य और किसे मिलेगी चुनौती?
ग्रहण का प्रभाव सिंह राशि में होने के कारण सभी 12 राशियों पर अलग-अलग असर पड़ेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं:
इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत (शुभ प्रभाव)
- वृषभ राशि: अटका हुआ धन वापस मिलेगा। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वरिष्ठों का सहयोग मिल सकता है। व्यापारिक सौदे मुनाफे में रहेंगे।
- मिथुन राशि: करियर में नए अवसर और प्रभावशाली लोगों से मुलाकात होगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा और परिवार में सुखद समाचार प्राप्त होंगे।
- तुला राशि: सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। किसी बड़ी बिजनेस डील के फाइनल होने के योग हैं। रिश्तों में चली आ रही कड़वाहट दूर होगी।
इन 4 राशियों को रहना होगा सावधान (नकारात्मक प्रभाव)
- सिंह राशि: ग्रहण इसी राशि में लग रहा है, अतः स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। मानसिक तनाव और चोट लगने की आशंका है। बड़े फैसले टाल दें।
- कर्क राशि: आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। फिजूलखर्ची बढ़ सकती है। निवेश या उधार देने से बचें।
- कन्या राशि: बनते कामों में रुकावट आ सकती है। करीबियों से गलतफहमी होने की संभावना है। शांत रहकर काम करें।
- वृश्चिक राशि: मानसिक दबाव और एकाग्रता की कमी महसूस होगी। बुजुर्गों की सेहत की चिंता रह सकती है। जोखिम भरे कार्यों से दूर रहें।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
धार्मिक शास्त्र सूतक काल और ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं:
- वर्जित कार्य: सूतक लगने के बाद पूजा-पाठ, भोजन बनाना और नए कार्यों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
- क्या करें: ग्रहण के समय इष्ट देव के मंत्रों का जाप और ध्यान करना श्रेष्ठ होता है।
- ग्रहण के बाद: ग्रहण समाप्त होने पर पूरे घर में गंगाजल छिड़कें, स्वयं स्नान करें और सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करें।




















