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कांग्रेस जिला अध्यक्षों को दिखाना होगा परफॉर्मेंस, इसी से रैंकिंग

रायपुर। कांग्रेस जिला अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं कि अब जिला संगठनों का काम पुराने पैटर्न पर नहीं चलेगा। छत्तीसगढ़ में संगठन सृजन के तहत नियुक्त नए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के प्रदेश में ही एआईसीसी के स्तर पर ट्रेनिंग दी जाएगी। पीसीसी को कम से कम दस दिनों का आवासीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण के बाद संगठनात्मक गतिविधियों और परफॉर्मेंस का आकलन शुरू होगा। वहीं प्रत्येक छह माह में जिला अध्यक्षों के कामकाज की रैंकिंग भी होगी। इसके आधार पर संबंधित जिला संगठन को लेकर एआईसीसी आगामी निर्णय करेगी। दिल्ली में नए जिला अध्यक्षों के अभिमुखीकरण कार्यक्रम के दौरान इस मामले में आलाकमान ने स्पष्ट संकेत भी दे दिए हैं।

प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस संगठन में निचले स्तर की कमेटियों के कामकाज में अब तेजी नजर आ सकती है। संगठन सृजन के तहत नियुक्त जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण के बाद फील्ड में चौतरफा एक्सरसाइज करनी पड़ेगी। यही वजह है कि आने वाले दिनों में संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर कई बदलाव भी नजर आएंगे। बल्कि सत्ताधारी दल से निपटने आक्रामक कार्यशैली अपनानी पड़ेगी। इतना ही | नहीं प्रशिक्षण के बाद जिला संगठनों के सामने परफॉर्मेंस दिखाने की भी चुनौती होगी। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कामकाज के आधार पर ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। आलाकमान ने कह दिया है कि संगठन की मजबूती और बिना गुटबाजी के समन्वय के साथ काम करने वाले ही टिक पाएंगे। जाहिर है कि परफार्मेस को आधार बनाते हुए रैंकिग की जाएगी। गौतरलब है कि वर्तमान में स्थानीय संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल नहीं होने से भी संगठन के कामकाज पर असर पड़ता रहा है। इसे लेकर लगातार शिकायतें भी होती रही हैं, लेकिन समस्या अभी भी बरकरार है। जिला कमेटियों के नीचे काम करने वाला काडर तैयार तो किया गया लेकिन मॉनिटरिंग और संवाद के अभाव में संगठनात्मक ढांचा लगातार कमजोर होता गया है।

पंचायतों में भी संगठन का विस्तार

कांग्रेस के उदयपुर सम्मेलन में पंचायत स्तर पर भी संगठन के विस्तार का निर्णय लिया गया था। उदयपुर फार्मूले के तहत ही संगठन सृजन के दौरान मापदंडों का कड़ाई से पालन कराया गया। अभिमुखीकरण में भी दोहराया गया है कि पंचायत स्तर पर अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे पहले ब्लॉक कमेटियों के नीचे मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति कर कमेटियां गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह जोन, सेक्टर और बूथ स्तर पर भी गतिविधियां चल रही हैं।

गुटबाजी में घिरे तो कार्रवाई

जिला अध्यक्षों को गुटबाजी से दूर रहने के सख्त निर्देश हैं। किसी एक वरिष्ठ नेता के प्रभाव में रहने के बजाय स्वतंत्र और निष्पक्षता के साथ काम करने कहा गया है। इन मापदंडों में खरा उतरने वाले जिला अध्यक्ष ही टिक पाएंगे।

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